विकास का पैसा गया कहाँ? गोंडा में 19 पंचायत सचिवों ने मिलकर कर दिया लाखों का खेल, प्रशासन हैरान

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News India Live, Digital Desk : कहते हैं कि अगर नीयत साफ़ हो, तो एक गांव की सूरत बदली जा सकती है। लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो विकास की फाइलें दफ्तरों की धूल फाँकने लगती हैं। कुछ ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से सामने आया है, जिसने पूरे जिले के प्रशासनिक अमले में खलबली मचा दी है।

यहाँ 6 अलग-अलग ब्लॉकों में तैनात 19 ग्राम पंचायत सचिवों पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि इन्होंने सरकारी नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपयों का ऐसा भुगतान कर दिया, जिसका कोई हिसाब-किताब ढंग से नहीं मिल रहा है।

मामला आखिर है क्या?
दरअसल, गांव में होने वाले विकास कार्यों के लिए सरकार बजट जारी करती है। इन सचिवों की जिम्मेदारी होती है कि वे पारदर्शिता के साथ उस पैसे को सही जगह इस्तेमाल करें। लेकिन जाँच में सामने आया कि लाखों रुपयों के भुगतान में भारी गड़बड़ी की गई है। कई ऐसे पेमेंट मिले हैं जिन्हें बिना किसी ठोस आधार या सही प्रक्रिया के पास कर दिया गया।

इन 6 ब्लॉकों में मचा हड़कंप
जिले के अलग-अलग ब्लॉकों से जुड़ा यह मामला यह इशारा करता है कि गड़बड़ी सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि कई स्तरों पर हो रही थी। जब उच्च अधिकारियों ने फाइलों की बारीकी से जांच शुरू की, तो परत-दर-परत सच सामने आने लगा। अब इन सभी 19 सचिवों को चिन्हित कर लिया गया है और उनसे जवाब तलब किया जा रहा है।

जनता के भरोसे का क्या?
एक आम ग्रामीण जब अपनी सड़क, नाली या लाइट के लिए प्रधान और सचिव के चक्कर लगाता है, तो उसे बजट न होने का रोना रोया जाता है। वहीं दूसरी तरफ, जब लाखों की हेराफेरी की खबरें आती हैं, तो आम आदमी का सिस्टम से भरोसा उठने लगता है। गोंडा का यह 'पेमेंट घोटाला' सिर्फ रुपयों का नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीदों का भी घोटाला है।

अब आगे क्या होगा?
खबर है कि जिला प्रशासन इन सचिवों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है। अगर ये सचिव संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो इन पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी शिकंजा भी कस सकता है। जिला विकास अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अफसर लगातार रिपोर्ट पर नज़र बनाए हुए हैं।

अक्सर हम सोचते हैं कि भ्रष्टाचार छोटे स्तर पर कम होगा, लेकिन ये मामला दिखाता है कि निगरानी अगर ढीली हो, तो दीमक कहीं भी लग सकती है। देखना यह होगा कि दोषियों को सजा मिलती है या यह मामला भी पुरानी फाइलों की तरह दब कर रह जाता है।

आप इस पूरी घटना पर क्या राय रखते हैं? क्या इन भ्रष्ट अफसरों की संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए? कमेंट में अपनी बात ज़रूर बताएं।