सुप्रीम कोर्ट ने बस्ती के डीआईजी की आवाज का सुबूत माँगा जानिए क्या है 2020 का वह वायरल ऑडियो विवाद
News India Live, Digital Desk : अगर आप भी यह मानते हैं कि "वर्दी का मतलब ताकत का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए," तो यह खबर आपको बहुत सुकून देगी। सुप्रीम कोर्ट से एक ऐसी खबर आई है जो यूपी पुलिस के कामकाज और एक आम आदमी की हिम्मत की कहानी बयां करती है।
मामला एक आईपीएस अफसर, जो अभी बस्ती रेंज के डीआईजी (DIG) हैं, और एक 70 साल के बुजुर्ग नागरिक के बीच का है। कोर्ट ने डीआईजी संजीव त्यागी (Sanjeev Tyagi) को सख्त आदेश दिया है कि उन्हें अपनी आवाज का नमूना (Voice Sample) देना होगा।
आइये, आसान शब्दों में इस पूरे मामले की परतें खोलते हैं और जानते हैं कि आखिर 5 साल पुराने एक ऑडियो क्लिप ने इतने बड़े अफसर को कोर्ट के कटघरे में खड़ा कैसे कर दिया।
क्या था वो 2020 का 'बिजनौर ऑडियो' कांड?
कहानी अप्रैल 2020 की है। देश में कोरोना का डर फैला हुआ था। उस समय संजीव त्यागी बिजनौर में एसपी (SP) के पद पर तैनात थे। सोशल मीडिया पर एक ऑडियो रिकॉर्डिंग जंगल की आग की तरह फैल गई। इस क्लिप में कोई व्यक्ति तबलिगी जमात के लोगों और एक खास समुदाय के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, भड़काऊ और गालियों वाली भाषा (Communal Slur) का इस्तेमाल कर रहा था।
अफवाह यह थी कि यह आवाज बिजनौर के तत्कालीन एसपी संजीव त्यागी की ही है।
बुजुर्ग ने पूछा सवाल, पुलिस ने बना दिया 'देशद्रोही'?
इस कहानी का असली ट्विस्ट यहीं आता है। बिजनौर के रहने वाले एक बुजुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता, इस्लाममुद्दीन अंसारी, के पास जब यह क्लिप पहुंची, तो उन्होंने सोचा कि इसकी पुष्टि कर ली जाए। उन्होंने एसपी संजीव त्यागी के आधिकारिक (CUG) नंबर पर वह ऑडियो भेजा और बहुत शालीनता से पूछासर, सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि यह आपकी आवाज है। क्या वाकई में यह आप हैं?"
कायदे से एक पुलिस अफसर को "हाँ" या "नहीं" में जवाब देना चाहिए था या जांच करनी चाहिए थी। लेकिन हुआ इसका उलटा। पुलिस ने उल्टा अंसारी साहब पर ही एफआईआर (FIR) ठोक दी! आरोप लगा दिए गए कि यह बुजुर्ग व्यक्ति समाज में नफरत फैला रहा है, शांति भंग कर रहा है और आईटी एक्ट का उल्लंघन कर रहा है।
सोचिये, सवाल पूछने वाले को ही मुजरिम बना दिया गया ताकि कोई और जुबान न खोल सके।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की 'दादागिरी' पर लगाई लगाम
जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो जजों (जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस विनोद चंद्रन) ने पुलिस की फाइल देखकर अपना सिर पकड़ लिया। कोर्ट ने पुलिस को जबरदस्त फटकार लगाई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा— "यह क्या मजाक है? एक नागरिक ने सिर्फ आपसे क्लेरिफिकेशन माँगा था कि क्या यह आपकी आवाज है। आपने उसी के खिलाफ मुकदमा कर दिया? यह सत्ता और ताकत का खुला दुरुपयोग (Abuse of Power) है।"
अदालत के बड़े फैसले:
- FIR रद: कोर्ट ने बुजुर्ग इस्लाममुद्दीन अंसारी के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों को तुरंत खारिज (Quash) कर दिया।
- डीआईजी की पेशी: कोर्ट को दाल में काला नजर आया, इसलिए उन्होंने आदेश दिया कि डीआईजी संजीव त्यागी को अपनी आवाज का नमूना देना होगा।
हैदराबाद लैब में होगी जांच, यूपी में नहीं!
यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट शायद जानता था कि यूपी में जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए आदेश दिया गया है कि डीआईजी साहब को तेलंगाना (हैदराबाद) की फॉरेंसिक लैब (CSFL) में जाकर अपनी वॉइस का सैंपल देना होगा।
- अगले 3 हफ्तों में यह प्रक्रिया पूरी होगी।
- फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स मैच करेंगे कि 2020 वाली उस वायरल क्लिप की आवाज और डीआईजी की आवाज एक ही है या नहीं।
आगे क्या?
अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आई यानी आवाज मैच हो गई, तो डीआईजी संजीव त्यागी के लिए आने वाले दिन बहुत भारी पड़ सकते हैं। यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो वर्दी की आड़ में जनता की आवाज दबाने की कोशिश करते हैं।
अब सबकी नजरें हैदराबाद लैब की उस रिपोर्ट पर हैं। सच जो भी हो, लेकिन न्याय की उम्मीद आज फिर जाग गई है।