इकरा हसन का पलटवार वाजपेयी जी का नाम लेकर बीजेपी से पूछा सीधा सवाल, सिर्फ पहली दो लाइनें गाना क्या गलत है?

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News India Live, Digital Desk : संसद के इस शीतकालीन सत्र में अगर किसी युवा सांसद की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, तो वो हैं कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन (Iqra Hasan)। अक्सर शांत दिखने वाली इकरा जब अपनी बात रखती हैं, तो वो तर्क और तथ्यों (Facts) के साथ होती है। हाल ही में 'वंदे मातरम' को लेकर चल रही सियासी रस्साकशी के बीच उन्होंने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सत्ता पक्ष को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

आपको याद होगा कि सदन में "वंदे मातरम सर" वाला मुद्दा काफी गर्म था। इस पर इकरा हसन ने अपनी बात रखी और बहुत ही सलीके से समझाया कि आखिर मुसलमान इस गीत के कुछ हिस्सों को लेकर असहज क्यों महसूस करते हैं।

आइये, आसान शब्दों में उनके तर्कों को समझते हैं।

'सुजलाम-सुफलाम' इबादत नहीं, तारीफ है
इकरा हसन ने संसद में बहुत साफ़ शब्दों में कहा कि 'वंदे मातरम' के जो शुरुआती शब्द हैं—सुजलाम, सुफलाम, मलयज शीतलाम—इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने इसका मतलब समझाते हुए कहा कि यह हमारी धरती मां की तारीफ है।

  • सुजलाम: जिसके पास अच्छा पानी है।
  • सुफलाम: जो अच्छे फलों से लदी है।
  • मलयज शीतलाम: जहाँ मलय पर्वत से ठंडी हवाएं आती हैं।

इकरा का कहना था कि यह कुदरत की खूबसूरती का बखान है और इसमें किसी भी मुसलमान को कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत वहां आती है जहाँ गीत के अगले हिस्सों में धरती को देवी मानकर 'पूजा' करने की बात आती है। उन्होंने समझाया कि इस्लाम में ईश्वर (अल्लाह) के सिवा किसी और की पूजा (इबादत) की मनाही है। इसका मतलब यह नहीं कि देशप्रेम कम है, बस इबादत का तरीका अलग है।

अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र क्यों?
इकरा ने अपनी बात में एक बहुत बड़ा "ट्रम्प कार्ड" खेला। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी का जिक्र किया। इकरा ने याद दिलाया कि एक समय पर वाजपेयी जी और कुछ अन्य नेताओं ने भी इस बात को स्वीकार किया था कि अगर किसी को धार्मिक कारणों से पूरा गीत गाने में आपत्ति है, तो वो सिर्फ़ पहली दो लाइनें (सुजलाम-सुफलाम वाली) गा सकते हैं।

इकरा ने तंज कसते हुए पूछा"अगर हम वही बात आज कह रहे हैं, तो हमें 'तुष्टिकरण' (Appeasement) वाला कहा जाता है। तो क्या अटल बिहारी वाजपेयी जी भी तुष्टिकरण कर रहे थे?"

देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत
सपा सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि हर किसी की देशभक्ति साबित करने का पैमाना एक जैसा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कोई 'वंदे मातरम' कहकर देश को सलाम करता है, तो कोई 'जय हिंद' कहकर। भावना देश के प्रति सम्मान की होनी चाहिए, जबरदस्ती बुलवाने की नहीं।