Supreme Court Action : छत्तीसगढ़ के विधायक को सुप्रीम कोर्ट से राहत, लेकिन कड़ी शर्त के साथ राज्य में प्रवेश पर पाबंदी

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News India Live, Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के एक मौजूदा विधायक को बड़ी राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है। हालांकि, यह आजादी पूरी तरह से 'फ्री' नहीं है। न्यायमूर्ति की पीठ ने विधायक को निर्देश दिया है कि जमानत की अवधि के दौरान वे छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहेंगे। यह आदेश गवाहों को प्रभावित करने की संभावना और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

अदालत का फैसला: जमानत भी और पाबंदी भी

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विधायक को जेल से रिहा किया जाएगा, लेकिन उन्हें निम्नलिखित नियमों का पालन करना होगा:

राज्य से निर्वासन (Stay out of State): विधायक को ट्रायल पूरा होने या अगले आदेश तक छत्तीसगढ़ राज्य की भौगोलिक सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी।

गवाहों से दूरी: यह शर्त इसलिए लगाई गई है ताकि एक रसूखदार जनप्रतिनिधि होने के नाते वे जांच को प्रभावित न कर सकें या गवाहों पर दबाव न डाल सकें।

लोकेशन की जानकारी: संभवतः उन्हें अपनी वर्तमान लोकेशन और संपर्क विवरण संबंधित पुलिस स्टेशन या अदालत को नियमित रूप से देने होंगे।

क्यों लगाई जाती है ऐसी 'कड़ी शर्त'?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, CrPC (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत अदालतों को जमानत देते समय 'उचित शर्तें' लगाने का अधिकार है। राज्य से बाहर रहने का आदेश तब दिया जाता है जब:

आरोपी एक प्रभावशाली व्यक्ति (जैसे विधायक या सांसद) हो।

अपराध की प्रकृति गंभीर हो और जांच अभी संवेदनशील मोड़ पर हो।

पीड़ित पक्ष या गवाहों की सुरक्षा को खतरा महसूस हो।

विधायक के राजनीतिक करियर पर असर?

राज्य से बाहर रहने के आदेश का मतलब है कि विधायक न तो अपने विधानसभा क्षेत्र में जा पाएंगे और न ही सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे (जब तक कि विशेष अनुमति न मिले)।

जनता से दूरी: अपने क्षेत्र से दूर रहने के कारण विकास कार्यों और जनसंवाद पर गहरा असर पड़ेगा।

संसदीय स्थिति: यदि वे लंबे समय तक सदन से अनुपस्थित रहते हैं, तो उनकी सदस्यता को लेकर भी तकनीकी सवाल उठ सकते हैं।

आगे क्या होगा?

विधायक को अब राज्य से बाहर किसी अन्य शहर में अपना ठिकाना बनाना होगा। यदि वे इस शर्त का उल्लंघन करते पाए जाते हैं, तो उनकी जमानत तत्काल रद्द (Cancel) की जा सकती है और उन्हें वापस जेल भेजा जा सकता है।