बिहार असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती अब नौकरी के साथ भी पूरी कर सकेंगे PhD BSUSC ने बदला नियम, अभ्यर्थियों को बड़ी राहत
News India Live, Digital Desk: बिहार के उच्च शिक्षा विभाग और BSUSC ने उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ा दरवाजा खोल दिया है, जो योग्यता तो रखते हैं लेकिन पीएचडी (PhD) की डिग्री अभी प्रक्रिया में है। नए अपडेट के अनुसार, अब अभ्यर्थी असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयनित होने के बाद भी अपनी रिसर्च और पीएचडी पूरी कर सकेंगे।
क्या है नया प्रावधान?
अमूमन असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में पीएचडी अनिवार्य या एक बड़ा वेटेज (Score) रखती है। लेकिन बिहार में चल रही भर्ती प्रक्रिया में कुछ विशेष श्रेणियों और विषयों के लिए राहत दी गई है:
नौकरी के साथ शोध: जिन अभ्यर्थियों का चयन हो जाएगा, उन्हें कार्यभार संभालने के बाद एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी पीएचडी डिग्री पूरी करने की छूट मिल सकती है।
अनुभव और नेट (NET): यूजीसी के नियमों का पालन करते हुए, NET/BET क्वालिफाइड उम्मीदवारों के लिए यह एक सुनहरा मौका है कि वे पहले सेवा में आएं और फिर अपनी उच्च शिक्षा पूरी करें।
पेंडिंग पीएचडी वालों को मौका: ऐसे छात्र जिनका शोध कार्य अंतिम चरण में है या जो इंटरव्यू राउंड तक पहुँच चुके हैं, उनके लिए चयन प्रक्रिया में शामिल होना अब आसान होगा।
BSUSC वैकेंसी की स्थिति
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में करीब 4,638 असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती प्रक्रिया को गति दे रहा है। कोर्ट के आदेशों और आरक्षण रोस्टर के पालन के बाद अब इस भर्ती में तेजी आने की उम्मीद है।
उम्मीदवारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अपडेट?
करियर की शुरुआत: अब पीएचडी की डिग्री के इंतजार में आपकी उम्र और मौका हाथ से नहीं निकलेगा।
आर्थिक सुरक्षा: नौकरी मिलने के बाद आप आर्थिक रूप से निश्चिंत होकर अपना शोध कार्य बेहतर तरीके से पूरा कर पाएंगे।
शिक्षा की गुणवत्ता: कॉलेजों को जल्दी शिक्षक मिल सकेंगे, जिससे छात्रों की पढ़ाई का नुकसान नहीं होगा।