एशियन गेम्स के ठीक पहले ट्रेनिंग कैंप में मची अफरा-तफरी, वरुण सान्याल के साथ हुआ बड़ा हादसा
अंतरराष्ट्रीय खेल जगत से भारत के लिए एक बेहद निराशाजनक और दिल तोड़ने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने देश भर के खेल प्रेमियों को गहरे सदमे में डाल दिया है। मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स यानी एमएमए (MMA) की दुनिया में भारत का नाम रौशन करने वाले स्टार फाइटर वरुण सान्याल (Varun Sanyal) आगामी एशियन गेम्स से आधिकारिक रूप से बाहर हो चुके हैं। उनके इस तरह अचानक बाहर होने की मुख्य वजह उनकी कोई चोट नहीं, बल्कि रिंग में उतरने से ठीक पहले वजन घटाने (Weight Cutting) के लिए की गई बेहद कठिन और खतरनाक ट्रेनिंग प्रक्रिया बनी है। खेल जगत के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रतियोगिता के तय वजन वर्ग (Weight Category) में आने के लिए वरुण पिछले कई दिनों से अत्यधिक पसीना बहा रहे थे और उन्होंने अपने खान-पान पर बेहद कड़ा नियंत्रण रखा हुआ था। इसी अत्यधिक शारीरिक और मानसिक दबाव के बीच अचानक उनका शरीर जवाब दे गया और वे ट्रेनिंग सेशन के दौरान ही बुरी तरह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। जैसे ही यह घटना घटी, वैसे ही कैंप में मौजूद कोचों और सपोर्ट स्टाफ के हाथ-पांव फूल गए और उन्हें तुरंत बिना किसी देरी के नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज शुरू किया गया। इस अप्रत्याशित घटना ने एक बार फिर से कॉम्बैट स्पोर्ट्स में खिलाड़ियों द्वारा वजन घटाने के नाम पर उठाए जाने वाले जानलेवा जोखिमों और उसकी वैज्ञानिक सीमाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर खेल विशेषज्ञों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।
वजन घटाने का जानलेवा खेल और एमएमए फाइटर्स की शारीरिक सीमाओं का कड़ा इम्तिहान
मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) या बॉक्सिंग जैसे खेलों में यह एक आम चलन है कि खिलाड़ी अपने नेचुरल वेट क्लास से नीचे उतरकर खेलने के लिए कुछ ही दिनों में कई-कई किलोग्राम वजन तेजी से कम करते हैं, जिसे तकनीकी भाषा में 'एक्सट्रीम वेट कटिंग' कहा जाता है। वरुण सान्याल भी अपनी कैटेगिरी के मुताबिक तय वजन सीमा को पार करने के लिए पिछले कुछ हफ्तों से लगातार डिहाइड्रेशन (शरीर से पानी की कमी) और अत्यधिक कठोर वर्कआउट के दौर से गुजर रहे थे। शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की भारी कमी होने के कारण उनके आंतरिक अंगों और तंत्रिका तंत्र पर बहुत अधिक दबाव पड़ गया, जिसे उनका शरीर सहन नहीं कर पाया। जब कोई एथलीट अपने शरीर को भूखा रखकर और बिना पानी पिए घंटों पसीना बहाता है, तो मस्तिष्क और हृदय को मिलने वाला रक्त संचार बाधित हो जाता है, जिससे बेहोशी या कार्डियक अरेस्ट जैसी खतरनाक स्थितियां पैदा हो जाती हैं। वरुण के साथ भी ठीक ऐसा ही हुआ, जहां मेडल जीतने की दीवानगी और देश के लिए स्वर्ण पदक हासिल करने के जुनून ने उन्हें अपनी शारीरिक क्षमता से कहीं अधिक आगे जाने पर मजबूर कर दिया। इस घटना ने देश भर के खेल अकादमियों और न्यूट्रिशनिस्ट्स को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या खिलाड़ियों की सुरक्षा से समझौता करके उन्हें इस तरह के जानलेवा वजन घटाने के चक्रव्यूह में धकेलना उचित है या नहीं।
मेडल की उम्मीदों को लगा करारा झटका, वरुण सान्याल के एशियन गेम्स से बाहर होने का देश को मलाल
वरुण सान्याल का इस तरह से अचानक एशियन गेम्स से बाहर होना न केवल उनके व्यक्तिगत खेल करियर के लिए एक बहुत बड़ा झटका है, बल्कि यह भारत की मेडल तालिका (Medal Tally) के लिए भी एक अपूरणीय क्षति के समान है। देश को उनसे स्वर्ण पदक जीतने की बहुत अधिक उम्मीदें थीं, क्योंकि वे अपनी बेहतरीन ग्रैपलिंग और स्ट्राइकिंग स्किल्स के लिए जाने जाते हैं। इस प्रतिष्ठित बहु-खेल महाकुंभ में भाग लेने के लिए उन्होंने पिछले कई महीनों से दिन-रात एक करके पसीना बहाया था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जब अस्पताल में होश आने के बाद उन्हें यह पता चला कि वे अब इस टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं बन पाएंगे और उन्हें डॉक्टर की सख्त सलाह पर पूरी तरह से रेस्ट करना होगा, तो उनका और उनके कोचों का दिल टूट गया। खेल मंत्रालय और भारतीय एमएमए महासंघ ने उनके इस स्वास्थ्य संकट पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उनके जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना की है। साथ ही, इस घटना के बाद खेल प्रशासन ने भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए खिलाड़ियों के स्वास्थ्य प्रबंधन और वैज्ञानिक न्यूट्रिशन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि किसी भी अन्य एथलीट को इस तरह के खतरनाक दौर से न गुजरना पड़े। वरुण सान्याल की यह कहानी हर उस युवा एथलीट के लिए एक बड़ी सीख है जो खेल में सफलता पाने के लिए अपनी सेहत को दांव पर लगा देते हैं, क्योंकि जान है तो जहान है और खेल का मैदान तभी खूबसूरत लगता है जब खिलाड़ी सुरक्षित और स्वस्थ रहता है।