छत्तीसगढ़ के बस्तर के दुर्गम और संभ्रांत जंगलों में पुलिस का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला एंटी-नक्सल ऑपरेशन

छत्तीसगढ़ के बस्तर के दुर्गम और संभ्रांत जंगलों में पुलिस का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला एंटी-नक्सल ऑपरेशन

भारत के सुरक्षा बलों और छत्तीसगढ़ पुलिस ने लाल आतंक के खिलाफ चलाए जा रहे अपने अभियानों के इतिहास में एक ऐसा सनसनीखेज और अभूतपूर्व अध्याय जोड़ दिया है, जिसके बारे में शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील और माओवादी प्रभावित माने जाने वाले बस्तर क्षेत्र के घने जंगलों और बीहड़ों के भीतर सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने एक ऐसा खुफिया अभियान चलाया, जिसने नक्सलियों की पूरी आर्थिक कमर तोड़कर रख दी है। सुरक्षा बलों को लंबे समय से इस बात की पुख्ता खुफिया जानकारियां मिल रही थीं कि बस्तर के इन अछूते और दुर्गम इलाकों में नक्सलियों के शीर्ष कमांडरों ने भारी मात्रा में अवैध हथियार, गोला-बारूद और बेहिसाब संपत्ति छुपा रखी है। इसी इनपुट के आधार पर सुरक्षा बलों के सैकड़ों जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर जंगलों के भीतर कई किलोमीटर पैदल मार्च किया और नक्सलियों के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों को चारों तरफ से घेर लिया। जैसे ही पुलिस ने चिन्हित स्थानों पर आधुनिक मेटल डिटेक्टर्स और अर्थ-मूविंग टूल्स की मदद से खुदाई शुरू की, तो जमीन के भीतर का ऐसा खौफनाक और हैरान कर देने वाला सच बाहर आया जिसे देखकर खुद ऑपरेशन में शामिल सुरक्षा अधिकारी भी अछंभे में पड़ गए। माओवादी संगठन जो हमेशा गरीबों और आदिवासियों के नाम पर हथियार उठाने का ढोंग करते हैं, वे असल में जंगलों के भीतर अकूत अवैध संपत्ति और खजाने के मालिक बनकर बैठे थे, जिसका पर्दाफाश अब पूरी दुनिया के सामने हो चुका है।

जमीन के भीतर गाड़े गए ड्रमों से निकला सोने के बिस्किट का जखीरा और आधुनिक घातक हथियारों का बड़ा जंजाल

इस सनसनीखेज सर्च ऑपरेशन के दौरान जब सुरक्षा बलों ने बस्तर के जंगलों में एक खास जगह की खुदाई की, तो उन्हें जमीन के कई फीट नीचे प्लास्टिक के भारी-भरकम और एयर-टाइट ड्रम दबे हुए मिले। जब इन ड्रमों को सावधानीपूर्वक बाहर निकालकर काटा गया, तो अंदर का नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। उन ड्रमों के भीतर से सोने के चमकदार बिस्किट, करोड़ों रुपये की बेहिसाब नकदी और देश-विदेश में प्रतिबंधित अत्याधुनिक हथियार बरामद हुए। नक्सलियों के इस खजाने में आधुनिक असॉल्ट राइफलें जैसे कि AK-47, इंसास और अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर के साथ-साथ भारी मात्रा में कारतूस और विस्फोटक सामग्रियां भरी हुई थीं। माओवादी दशकों से इन जंगलों में बैठकर अवैध वसूली, लेवी वसूलने, ठेकेदारों से रंगदारी और सरकारी योजनाओं के फंड को लूटकर जो काला धन इकट्ठा कर रहे थे, उसे उन्होंने इस तरह जमीन के नीचे सुरक्षित छुपा रखा था ताकि आपातकाल के समय या पुलिस की दबिश के दौरान इसका इस्तेमाल किया जा सके। इतने बड़े पैमाने पर सोने के बिस्किट और हथियारों का मिलना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि बस्तर के भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाकर नक्सली संगठन केवल अपनी तिजोरी भरने और आपराधिक साम्राज्य को मजबूत करने का काम कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह जब्ती पिछले कई दशकों में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान पकड़ी गई सबसे बड़ी संपत्तियों में से एक है, जिससे माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व को मानसिक और आर्थिक रूप से बहुत बड़ा आघात लगा है।

लाल आतंक के खात्मे की ओर एक और बड़ा कदम, बस्तर की बदलती तस्वीर और सुरक्षा बलों की ऐतिहासिक कामयाबी

बस्तर के जंगलों से नक्सलियों के इस गुप्त खजाने और हथियारों के जखीरे का बरामद होना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि अब सुरक्षा बलों की पहुंच उन गुप्त ठिकानों तक भी हो चुकी है जिन्हें नक्सली कभी अपना अजय किला मानते थे। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीतिक नीतियों, सुरक्षा कैंपों के विस्तार और विकास कार्यों के कारण नक्सलियों का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है, और अब उनके पास न तो सुरक्षित ठिकाने बचे हैं और न ही जनता का समर्थन। जब आदिवासियों को यह सच्चाई पता चलती है कि उनके तथाकथित क्रांतिकारी नेता जंगलों में सोने के बिस्किट और अवैध हथियारों के ढेर दबाकर ऐश की जिंदगी जी रहे हैं, तो उनका मोहभंग तेजी से हो रहा है और वे मुख्यधारा में लौटने लगे हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस बात की गहनता से जांच कर रही हैं कि इस खजाने को छिपाने में किन-किन बाहरी तस्करों, सफेदपोश सहयोगियों और भूमिगत मददगारों का हाथ था, ताकि उन तक भी कानून का शिकंजा कसा जा सके। बस्तर के इन सुदूर जंगलों में मिली यह सफलता भारतीय सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, उनकी पैनी रणनीति और पक्के इरादों की एक ऐसी मिसाल बन चुकी है जो आने वाले समय में देश से नक्सलवाद के पूर्ण सफाए की इबारत लिखने का काम करेगी।