जंग का सायरन थाईलैंड कंबोडिया बॉर्डर पर फिर बरसे गोले, सीजफायर हुआ धुआं धुआं

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News India Live, Digital Desk : दुनिया अभी यूक्रेन और गाजा के संघर्षों को देख ही रही थी कि अब एशिया के एक कोने से फिर धुएं के गुबार उठने लगे हैं। बात हो रही है थाईलैंड और कंबोडिया के बीच के पुराने तनाव की, जो कुछ वक्त के लिए शांत होता दिखा था, लेकिन अब लगता है कि वह शांति महज एक भ्रम थी।

खबर आ रही है कि थाईलैंड ने कंबोडिया पर ताजा एयरस्ट्राइक्स (airstrikes) की हैं। ये हमला ऐसे वक्त पर हुआ है जब हर किसी को लग रहा था कि दोनों देशों के बीच सब कुछ सुलझने वाला है। याद होगा कि अभी कुछ समय पहले ही अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की कोशिशों से एक सीजफायर यानी युद्धविराम का समझौता हुआ था। उस वक्त ऐसा लगा था कि अब बंदूकें खामोश हो जाएंगी और लोग चैन की सांस लेंगे।

लेकिन, ताज़ा हमलों ने इस सीजफायर समझौते (ceasefire deal) की धज्जियां उड़ा दी हैं। सवाल अब यह उठ रहा है कि क्या ट्रंप द्वारा करवाई गई वह सुलह इतनी कमजोर थी? बॉर्डर पर रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति किसी डरावने सपने से कम नहीं है। अभी उन्होंने अपने घरों से बाहर निकलना शुरू ही किया था कि आसमान से फिर मुसीबत बरसने लगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बॉर्डर डिस्प्यूट (border dispute) सिर्फ जमीन के एक टुकड़े का झगड़ा नहीं है, बल्कि अब यह नाक की लड़ाई बन गया है। ट्रंप की एंट्री से लगा था कि शायद कोई बड़ा कूटनीतिक हल निकल आएगा, लेकिन थाईलैंड के इस कदम ने जता दिया है कि मामला अभी भी बेहद संवेदनशील है।

अब सबसे बड़ा डर यह है कि अगर यह तनाव (tension) ऐसे ही बढ़ता रहा, तो क्या कंबोडिया चुप बैठेगा? जाहिर है, अगर जवाबी कार्रवाई हुई, तो हालात बद से बदतर हो जाएंगे। गूगल पर लोग लगातार सर्च कर रहे हैं कि "क्या थाईलैंड और कंबोडिया के बीच युद्ध शुरू हो गया है?" और यह डर जायज भी है।

फिलहाल, दुनिया की नजरें फिर से अमेरिका की तरफ भी हैं। क्या ट्रंप प्रशासन इसे अपनी कूटनीतिक विफलता मानेगा या फिर शांति बहाली के लिए कोई और सख्त कदम उठाया जाएगा? जो भी हो, अभी की सच्चाई यही है कि बॉर्डर पर माहौल गर्म है और शांति की उम्मीदें धुंधली पड़ती जा रही हैं। आम लोगों की जान एक बार फिर सांसत में है।