सिद्धारमैया या वेणुगोपाल आखिर कर्नाटक सरकार का रिमोट कंट्रोल किसके पास है?

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News India Live, Digital Desk : कर्नाटक की राजनीति में अक्सर 'पावर गेम' देखने को मिलता है, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। क्या आपने कभी सोचा है कि जब किसी राज्य में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मौजूद हों, तो क्या कोई बाहर का व्यक्ति आकर सरकार की बैठकों की अध्यक्षता कर सकता है?

यही वो सवाल है जिसे लेकर इन दिनों बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है। दरअसल, सारा विवाद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के बेंगलुरु दौरे से शुरू हुआ। बीजेपी ने सीधा आरोप लगाया है कि कर्नाटक में सिद्धारमैया मुख्यमंत्री जरूर हैं, लेकिन पर्दे के पीछे से सरकार के.सी. वेणुगोपाल चला रहे हैं। बीजेपी ने उन्हें 'सुपर सीएम' (Super CM) का दर्जा दे दिया है।

मामला आखिर है क्या?
बीजेपी के दिग्गज नेताओं का कहना है कि वेणुगोपाल ने कर्नाटक सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बाकायदा बैठक की। अब संवैधानिक नजरिए से देखें, तो वेणुगोपाल न तो कर्नाटक के विधायक हैं और न ही वहां की सरकार का हिस्सा। वे सिर्फ कांग्रेस पार्टी के एक पदाधिकारी हैं। ऐसे में सरकारी कामकाज में उनकी ऐसी दखलअंदाजी पर सवाल उठना लाजिमी था।

बीजेपी के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेताओं ने सोशल मीडिया पर फोटो साझा करते हुए पूछा है कि, "क्या अब कर्नाटक का प्रशासन दिल्ली के हाथ की कठपुतली बन गया है?" उनका दावा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार के बीच की अनबन को दबाने के लिए हाईकमान ने अपना एक 'सुपरवाइजर' बैठा दिया है।

आम जनता के बीच उठ रहे सवाल
किसी भी राज्य की सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। जब एक ऐसा चेहरा बैठकों का नेतृत्व करने लगे जिसे जनता ने चुना ही नहीं है, तो लोग भी इसे 'दिल्ली का हस्तक्षेप' मानने लगते हैं। राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस कर्नाटक के जरिए 2024 के रोडमैप पर नजर रख रही है, लेकिन इसके चक्कर में प्रशासन का ढांचा कमजोर हो रहा है।

बीजेपी का कड़ा रुख
बीजेपी इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती। उनका कहना है कि यह न केवल कर्नाटक के लोगों का अपमान है, बल्कि उस लोकतंत्र की गरिमा को भी चोट पहुंचाता है जहाँ मुख्यमंत्री सर्वोच्च होता है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने सफाई दी है कि वेणुगोपाल केवल चुनावी गारंटियों और पार्टी के कामकाज की समीक्षा कर रहे थे, इसका सरकारी आदेशों से कोई लेना-देना नहीं है।

अब हकीकत चाहे जो भी हो, लेकिन 'सुपर मुख्यमंत्री' वाला यह जुमला सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सिद्धारमैया सरकार इस बढ़ते विवाद को कैसे शांत करती है।