शशि थरूर का नया खुलासा मोदी और ट्रंप की 'दोस्ती' का असल मायना क्या है? जानकर रह जाएंगे दंग

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News India Live, Digital Desk: इंटरनेशनल पॉलिटिक्स की दुनिया बड़ी अजीब होती है, यहाँ कौन दोस्त है और कौन बस व्यापार के लिए साथ खड़ा है, यह समझना हर किसी के बस की बात नहीं। लेकिन जब डोनाल्ड ट्रंप जैसे विस्फोटक नेता प्रधानमंत्री मोदी को लेकर कुछ कहें, तो मामला दिलचस्प होना ही है। अभी हाल ही में ट्रंप ने मोदी को लेकर जो बयान दिया, उस पर कांग्रेस के कद्दावर नेता और अपनी शब्दावली के लिए मशहूर शशि थरूर ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है।

मामला क्या है?
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप अक्सर सार्वजनिक मंचों से पीएम मोदी की तारीफों के पुल बांधते नजर आते हैं। वह कभी उन्हें 'महान नेता' कहते हैं तो कभी अपना 'पक्का दोस्त'। लेकिन इसके साथ ही ट्रंप टैरिफ और व्यापार पर भारत की सख्ती का भी जिक्र करना नहीं भूलते। इसी विरोधाभास पर शशि थरूर ने एक बहुत ही संतुलित लेकिन सटीक टिप्पणी की है।

थरूर ने अपनी 'शब्दावली' से क्या समझाया?
शशि थरूर का कहना है कि जब ट्रंप जैसे नेता मोदी की तारीफ करते हैं, तो इसे केवल शब्दों तक ही सीमित नहीं समझना चाहिए। थरूर ने इशारों-इशारों में कहा कि इंटरनेशनल रिलेशन में 'व्यक्तिगत दोस्ती' एक हिस्सा हो सकती है, लेकिन जब बात राष्ट्रीय हितों की आती है, तो हर कोई अपना फायदा देखता है। ट्रंप के प्रशंसा करने के तरीके पर थरूर ने चुटकी लेते हुए यह समझाने की कोशिश की कि कूटनीति केवल मंच पर गले मिलने से नहीं, बल्कि व्यापार की शर्तों और जमीनी हकीकत से तय होती है।

दोस्ती और व्यापार का खेल
लेख का असल मुद्दा यही है—क्या वाकई ट्रंप और मोदी की ये बढ़ती नज़दीकियां भारत के लिए 'टैक्स' (Tariffs) में कोई छूट लेकर आएंगी? थरूर का विश्लेषण बताता है कि अमेरिका अपने आर्थिक हितों को लेकर कभी समझौता नहीं करेगा, चाहे सामने उनका 'कितना भी अच्छा दोस्त' क्यों न खड़ा हो। भारत के संदर्भ में थरूर की यह टिप्पणी उन लोगों के लिए एक आइना है जो विदेश नीति को सिर्फ दोस्ती-यारी की नजर से देखते हैं।