साधु या सियासी मुद्दा? जब पूर्णिया सांसद ने पूछ लिया कौन हैं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री? बिहार की राजनीति में आया भूचाल
News India Live, Digital Desk : बिहार की मिट्टी में सियासत और धर्म का गहरा नाता रहा है, लेकिन कभी-कभी ये रिश्ता इतनी कड़वाहट भर देता है कि बयानबाजी की मर्यादा टूटने लगती है। आजकल हर तरफ बागेश्वर धाम वाले बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के चर्चे हैं, लेकिन पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के एक ताज़ा बयान ने राज्य के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में एक नया 'बवंडर' खड़ा कर दिया है।
मामला केवल असहमति का नहीं, बल्कि सीधे प्रहार का है। दरअसल, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बिहार दौरे और उनकी कथाओं के बढ़ते असर के बीच पप्पू यादव ने साफ़ लफ़्ज़ों में पूछ लिया "आखिर ये धीरेंद्र शास्त्री कौन हैं? और हम किसी को भी उठाकर भगवान या कथावाचक की गद्दी पर कैसे बैठा सकते हैं?"
कड़े शब्दों का प्रहार
पप्पू यादव का गुस्सा यहीं नहीं रुका। उन्होंने कथित तौर पर ऐसी टिप्पणियां कीं जिनमें उन्होंने 'चोर' और 'बहरूपिया' जैसे शब्दों का जिक्र करते हुए व्यवस्था पर तंज कसा। उनका मानना है कि धर्म का रास्ता सेवा का होना चाहिए, न कि तमाशे का। सांसद के इस सख्त रवैये ने न केवल धीरेंद्र शास्त्री के अनुयायियों को आहत किया है, बल्कि उन राजनीतिक पार्टियों को भी मौका दे दिया है जो हिंदुत्व और आस्था के नाम पर मुखर रहती हैं।
आम जनता क्या सोच रही है?
एक आम आदमी के नज़रिए से देखें, तो यह लड़ाई आस्था बनाम तर्क की नजर आती है। जहाँ बाबा के समर्थक इसे उनकी लोकप्रियता से जलने वालों का विलाप कह रहे हैं, वहीं सांसद के समर्थक इसे पाखंड के खिलाफ उठाई गई एक आवाज़ बता रहे हैं। वैसे भी पप्पू यादव अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं, पर इस बार मामला बागेश्वर धाम जैसे विशाल जनाधार वाले संगठन से जुड़ा है, तो यह लड़ाई इतनी आसानी से शांत होने वाली नहीं लग रही।
सियासत और सरोकार
इस बहस के पीछे का एक और पहलू ये भी है कि क्या धीरेंद्र शास्त्री का बिहार आना आने वाले चुनाव की ज़मीन तैयार कर रहा है? पप्पू यादव की टिप्पणी को उसी घेरेबंदी का हिस्सा माना जा रहा है। कुल मिलाकर, पूर्णिया से उठी ये चिनगारी अब पूरे बिहार के व्हाट्सएप ग्रुपों और चाय की टपरियों पर चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन चुकी है। अब देखना ये है कि बाबा बागेश्वर का 'दिव्य दरबार' इस पर क्या पलटवार करता है।