Russia-Ukraine Update : 24 घंटे पहले मिसाइलों की बारिश पुतिन ने ट्रंप को कौन सा सिग्नल भेजा?
News India Live, Digital Desk : दुनिया की राजनीति में इस वक्त अगर सबसे गरमा-गरम कोई मुद्दा है, तो वह है फ्लोरिडा (Florida) में होने वाली एक 'खास' मुलाकात। सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की (Zelensky) की यह मीटिंग इस अंतहीन युद्ध पर लगाम लगा पाएगी?
लेकिन रुकिए... कहानी में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट है। और यह ट्विस्ट लाए हैं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन।
शांति की मीटिंग और पुतिन का 'पावर शो'
सोचिए जरा, दो नेता शांति (Peace) पर बात करने के लिए मिलने वाले हैं, और ठीक उससे पहले तीसरा नेता मिसाइलों की बरसात कर दे तो उसका क्या मतलब है?
फ्लोरिडा में ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन पर एक बड़ा हमला बोल दिया। इसे संयोग कहना मुश्किल है। ऐसा लग रहा है जैसे पुतिन ने जानबूझकर यह 'टाइपिंग' चुनी है। यूक्रेन की राजधानी कीव (Kyiv) समेत कई शहरों पर रात भर ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए गए।
यह हमला सिर्फ तबाही के लिए नहीं था, बल्कि यह एक 'ओपन वार्निंग' (खुली चेतावनी) थी।
पुतिन का अल्टीमेटम: "प्यार से मानो, वरना..."
पुतिन ने इस हमले के जरिये ट्रंप और जेलेंस्की, दोनों को एक कड़ा संदेश भेजा है। रूस का कहना बिल्कुल साफ़ है उन्हें वह 'शांति प्रस्ताव' मंज़ूर नहीं है जो सिर्फ यूक्रेन या अमेरिका के फायदे का हो।
पुतिन ने बातों-बातों में एक तरह का अल्टीमेटम दे दिया है। उनका कहना है कि अगर यूक्रेन 'शांति प्रस्तावों' (Peace Proposals) को स्वीकार नहीं करता और रूस की शर्तें नहीं मानता, तो मास्को "ताकत के दम पर" (By Force) अपना समाधान निकालेगा। यानी संदेश साफ है बातचीत की टेबल पर हमारी सुनो, नहीं तो मैदान-ए-जंग में और बुरा हाल करेंगे।
जेलेंस्की के लिए 'आगे कुआं, पीछे खाई'
जेलेंस्की के लिए यह वक्त बहुत मुश्किल है। वो अमेरिका इसलिए गए हैं ताकि ट्रंप से सुरक्षा की गारंटी ले सकें और युद्ध को सम्मानजनक तरीके से खत्म कर सकें। ट्रंप, जो खुद को एक 'डील मेकर' मानते हैं, उनके पास युद्ध रोकने का अपना ही कोई प्लान है।
लेकिन पुतिन की इस आक्रामकता ने बता दिया है कि रूस अभी झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं है। रूस चाहता है कि जमीनी हकीकत को स्वीकार किया जाए (यानी जिन इलाकों पर रूस का कब्जा है, वो उसके ही रहें), जबकि यूक्रेन अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं।
अब आगे क्या होगा?
डोनाल्ड ट्रंप ने अक्सर कहा है कि वो चुटकियों में युद्ध रुकवा सकते हैं। अब जब वो और जेलेंस्की आमने-सामने होंगे, तो पूरी दुनिया यह देखेगी कि क्या ट्रंप पुतिन के इस "गुस्से" को ठंडा कर पाते हैं या नहीं।
पुतिन ने अपनी चाल चल दी है मीटिंग से पहले धुआंधार हमले करके उन्होंने अपना पक्ष मजबूत कर लिया है। अब गेंद ट्रंप और जेलेंस्की के पाले में है। क्या कोई बीच का रास्ता निकलेगा, या यह युद्ध 2026 में भी हमें ऐसी ही दुखद खबरें देता रहेगा?
आपका क्या मानना है?
क्या पुतिन की धमकियों से डरकर यूक्रेन को शर्तें मान लेनी चाहिए या लड़ते रहना चाहिए? और क्या ट्रंप वाकई इस युद्ध को रोक पाएंगे? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।