इजरायल ने खेला ऐसा दांव, कि अफ्रीका के दो टुकड़े होने की नौबत आ गई

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News India Live, Digital Desk : दुनिया में जंग और विवाद कम थे क्या, जो अब एक और "नया मोर्चा" खुल गया है? इस बार अखाड़ा बना है अफ्रीका, और चिंगारी लगाई है इजरायल (Israel) ने। इजरायल ने एक ऐसा फैसला ले लिया है, जिससे सिर्फ सोमालिया ही नहीं, बल्कि आधी दुनिया का बीपी हाई हो गया है।

बात हो रही है दुनिया के नक्शे पर एक लकीर खींचने की। मुद्दा है सोमालिलैंड (Somaliland) को एक अलग देश मानने का।

क्या है यह 'सोमालिलैंड' का माजरा?
थोड़ा फ्लैशबैक में चलते हैं। सोमालिया (Somalia) का नाम तो आपने सुना ही होगा, हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका का एक देश। इसी का उत्तरी हिस्सा है सोमालिलैंड। वैसे तो यह खुद को 1991 से ही अलग और आज़ाद देश मानता है इनके पास अपनी सेना है, अपनी करेंसी है और अपना सिस्टम भी। लेकिन दिक्कत यह है कि बाकी दुनिया इसे सोमालिया का ही हिस्सा मानती आई है। किसी बड़े देश ने आज तक इसे "देश" (Country) का दर्जा नहीं दिया।

इजरायल ने क्या "बम" फोड़ा है?
हाल ही में इजरायल के विदेश मंत्रालय ने इशारा किया कि वह सोमालिलैंड को एक आज़ाद देश के तौर पर मान्यता (Recognition) दे सकता है। बस फिर क्या था! सोमालिया भड़क गया।

सोमालिया के लिए यह उसके "घर के बंटवारे" जैसा है। इजरायल का यह कदम सीधे तौर पर सोमालिया की संप्रभुता (Sovereignty) पर चोट है।

दुनिया दो गुटों में क्यों बंट रही है?
जैसे ही इजरायल ने यह चाल चली, दुनिया में दोस्तों और दुश्मनों की लाइनें खिंच गईं:

  1. सोमालिया के साथी: इस मुद्दे पर सोमालिया अकेला नहीं है। तुर्की (Turkey), मिस्र (Egypt), जिबूती और पूरा अफ्रीकन यूनियन (AU) सोमालिया के पीछे आ खड़ा हुआ है। इनका कहना है कि सोमालिया एक है और उसके टुकड़े करना गलत है। तुर्की और मिस्र वैसे भी इजरायल से खफा रहते हैं, तो उन्हें नया बहाना मिल गया।
  2. इजरायल और इथियोपिया का गुट: इधर, इजरायल को सोमालिलैंड में अपना फायदा दिख रहा है। उधर, इथियोपिया (Ethiopia) भी सोमालिलैंड के साथ पींगे बढ़ा रहा है क्योंकि उसे समुद्र तक पहुंचने के लिए रास्ता (Port access) चाहिए। तो परदे के पीछे एक नया गठजोड़ बन रहा है।

इजरायल को इससे क्या मिलेगा?
आप सोच रहे होंगे कि गाज़ा और लेबनान में उलझा इजरायल, अफ्रीका के पचड़े में क्यों पड़ रहा है? असली खेल 'लोकेशन' का है।

सोमालिलैंड जिस जगह पर है (अदन की खाड़ी और लाल सागर के पास), वह सामरिक रूप से बहुत अहम है। इजरायल के दुश्मन—जैसे यमन के हूसी विद्रोही (Houthis)—यहीं आसपास सक्रिय हैं। इजरायल चाहता है कि इस इलाके में उसका कोई अपना भरोसेमंद "दोस्त" बैठा हो, जहाँ से वह दुश्मनों पर नज़र रख सके और अपने जहाज़ों को सुरक्षित निकाल सके।

सोमालिलैंड के बदले में इजरायल वहां मिलिट्री बेस भी बना सकता है। यानी, यह सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि "बिजनेस और सुरक्षा" की डील है।

अब आगे क्या?
अमेरिका और पश्चिमी देश भी थोड़े परेशान हैं। उन्हें डर है कि अगर सोमालिया बिखर गया तो इलाके में अशांति फैल जाएगी और आतंकवादी गुट (जैसे अल-शबाब) और मजबूत हो जाएंगे।

लेकिन इजरायल ने पासा फेंक दिया है। अगर उसने सच में सोमालिलैंड को देश मान लिया, तो यकीन मानिए अफ्रीकी राजनीति में बड़ा भूचाल आने वाला है।

आप क्या सोचते हैं?
क्या जो क्षेत्र 30 साल से खुद को चला रहा है (सोमालिलैंड), उसे देश का दर्जा मिल जाना चाहिए? या फिर यह बड़े देशों का अपना खेल है? कमेंट करके अपनी राय ज़रूर बताएं!