बिहार विधानसभा में ब्राह्मणवाद पर बवाल डिप्टी सीएम विजय सिन्हा बोले यह समाज के साथ गद्दारी है

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News India Live, Digital Desk: बजट सत्र के दौरान माले (CPIML) विधायक संदीप सौरव ने यूजीसी (UGC) के नए नियमों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातियों के साथ भेदभाव होता है और दावा किया कि "ब्राह्मणवादी मानसिकता" के लोगों के विरोध के कारण सुप्रीम कोर्ट ने कुछ नियमों को वापस लिया।

सदन में बहस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

1. विजय सिन्हा का तीखा हमला:

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा:

"संविधान और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान होना चाहिए। समाज के प्रति जो जहर बोया जा रहा है, उससे देश कमजोर हो रहा है।"

उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के जाति-विहीन समाज के सपने को तार-तार करने की कोशिश की जा रही है और "ऐसे लोग समाज के साथ गद्दारी करते हैं।"

2. पक्ष-विपक्ष में भिड़ंत:

राजद (RJD): विधायक आलोक मेहता ने पलटवार करते हुए कहा कि किसी जाति विशेष पर नहीं, बल्कि एक 'मानसिकता' पर बात की गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "चोर की दाढ़ी में तिनका है।"

भाजपा (BJP): विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि विपक्ष को ब्राह्मणों से तकलीफ है, जबकि भगवान कृष्ण ने भी सुदामा जैसे गरीब ब्राह्मण के पैर पखारे थे।

विधानसभा अध्यक्ष का एक्शन (Speaker's Ruling)

सदन में बढ़ते शोर-शराबे और हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) प्रेम कुमार ने हस्तक्षेप किया।

अमर्यादित शब्दों पर रोक: स्पीकर ने स्पष्ट किया कि सदन में किसी भी जाति या समुदाय को टारगेट करने वाली भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कार्रवाई: उन्होंने 'ब्राह्मणवाद' और बहस के दौरान इस्तेमाल किए गए अन्य विवादित शब्दों को सदन की कार्यवाही (Proceedings) से हटाने (Expunge) का आदेश दिया।

क्यों गरमाया है यह मुद्दा?

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब बिहार में 'भूमिहार ब्राह्मण' जाति प्रमाण पत्र और आरक्षण को लेकर पहले से ही बहस चल रही है। विपक्ष इसे सामाजिक न्याय की लड़ाई बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे समाज को बांटने की राजनीति करार दे रहा है।