सेन समाज का बड़ा फैसला सगाई के बाद मंगेतर से फोन पर बात करने पर रोक जूता चोरी जैसी रस्मों पर भी पाबंदी

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News India Live, Digital Desk : सेन समाज के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि आधुनिकता के नाम पर शादियों में हो रही विकृतियों को रोका जाएगा। समाज के अध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि इन बदलावों से न केवल पैसा बचेगा, बल्कि पारिवारिक विवाद भी कम होंगे।

शादियों के लिए जारी नई 'गाइडलाइंस' (Key Decisions)

सेन समाज ने विवाह की रस्मों को लेकर निम्नलिखित प्रतिबंध लगाए हैं:

मंगेतर से बातचीत पर रोक: सगाई (टीका) होने के बाद और शादी होने तक लड़का-लड़की एक-दूसरे से फोन पर बात नहीं करेंगे और न ही मिलेंगे। समाज का तर्क है कि इससे शादी से पहले होने वाले मनमुटाव या 'रिश्ता टूटने' की घटनाओं में कमी आएगी।

जूता चोरी रस्म बंद: शादियों में होने वाली 'जूता चोरी' की रस्म पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। समाज का कहना है कि इस रस्म के दौरान अक्सर पैसों को लेकर विवाद और कहासुनी हो जाती है, जो कड़वाहट पैदा करती है।

मेहमानों की सीमा (No Crowd): बारात में मेहमानों की संख्या सीमित करने का सुझाव दिया गया है ताकि कन्या पक्ष पर आर्थिक बोझ कम हो।

दहेज पर कड़ाई: दहेज के लेन-देन को हतोत्साहित करने और सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देने की अपील की गई है।

डीजे और फिजूलखर्ची: देर रात तक डीजे बजाने और शादी के कार्ड्स पर अत्यधिक खर्च करने के बजाय सादगी से निमंत्रण देने पर जोर दिया गया है।

नियम तोड़ने पर 'जुर्माना' (Penalties)

समाज ने केवल नियम ही नहीं बनाए, बल्कि उन्हें लागू करने के लिए दंड का प्रावधान भी किया है:

यदि कोई परिवार इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो समाज उन पर आर्थिक दंड (जुर्माना) लगा सकता है।

गंभीर उल्लंघन की स्थिति में परिवार का सामाजिक बहिष्कार या सामाजिक कार्यक्रमों से दूरी बनाने जैसी चेतावनी भी दी गई है।

फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

समर्थन: बुजुर्गों और समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह 'दिखावे की संस्कृति' को खत्म करने की दिशा में एक जरूरी कदम है।

विरोध: युवा पीढ़ी का तर्क है कि डिजिटल युग में मंगेतर से बात करने पर रोक लगाना व्यावहारिक नहीं है और यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है

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