RSS Meerut Event : मेरठ में बोले मोहन भागवत हिंदू होने का अर्थ है जोड़ना, देश तोड़ने वाली ताकतों से रहें सावधान

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News India Live, Digital Desk: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार, 22 फरवरी 2026 को मेरठ में आयोजित एक विशाल स्वयंसेवक समागम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। भागवत ने स्पष्ट किया कि हिंदू समाज का मूल स्वभाव ही सबको साथ लेकर चलना है, लेकिन वर्तमान समय में देश को भीतर से कमजोर करने वाली ताकतों से सजग रहने की आवश्यकता है।

1. हिंदुत्व की नई परिभाषा: "जो जोड़ता है, वही हिंदू है"

मोहन भागवत ने 'हिंदू' शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि यह किसी पूजा पद्धति या संप्रदाय का नाम नहीं है।

एकता का सूत्र: उन्होंने कहा, "हिंदू होने का अर्थ है जोड़ना। जो सबको साथ लेकर चले और समाज में एकता का भाव पैदा करे, वही सच्चा हिंदू है।"

विविधता में एकता: भागवत ने जोर देकर कहा कि हमारी संस्कृति ने कभी किसी को अलग नहीं माना, बल्कि विविधता को स्वीकार कर राष्ट्र निर्माण को प्राथमिकता दी है।

2. देश तोड़ने वाली ताकतों से अलर्ट रहने की चेतावनी

संबोधन के दौरान सरसंघचालक ने देश की आंतरिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्वयंसेवकों और समाज को आगाह करते हुए कहा:

भ्रम फैलाने की साजिश: कुछ शक्तियां ऐसी हैं जो समाज को जाति, भाषा और पंथ के नाम पर बांटने की कोशिश कर रही हैं।

सतर्क समाज: "देश को तोड़ने वाली ताकतें सक्रिय हैं। वे हमारे बीच दीवारें खड़ी करना चाहती हैं। हिंदू समाज को संगठित होकर ऐसी विघटनकारी ताकतों का मुकाबला करना होगा।"

3. मेरठ समागम की खास बातें

मेरठ के इस कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।

अनुशासन का प्रदर्शन: कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में अनुशासन और शारीरिक दक्षता का प्रदर्शन किया।

सामाजिक समरसता: भागवत ने सामाजिक समरसता (Social Harmony) पर जोर देते हुए कहा कि छुआछूत और भेदभाव के लिए हिंदू समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

4. भविष्य का रोडमैप: 'पंच परिवर्तन'

भागवत ने संघ के शताब्दी वर्ष के करीब होने के नाते 'पंच परिवर्तन' के मंत्र को दोहराया:

स्वदेशी: स्थानीय उत्पादों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।

कुटुंब प्रबोधन: पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करना।

पर्यावरण: जल संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त भारत।

नागरिक कर्तव्य: समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना।

समरसता: ऊंच-नीच के भाव को खत्म करना।