Rajasthan : 6 साल से जिस लाडले को ढूंढ रहा था परिवार, उसी के नीचे दब गया दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे 12 दिन की खुदाई और 50 लाख खर्च

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News India Live, Digital Desk: राजस्थान के दौसा (Dausa) जिले में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने 'दृश्यम' फिल्म की कहानी को भी पीछे छोड़ दिया है। 6 साल पहले रहस्यमयी तरीके से गायब हुए 4 साल के मासूम प्रिंस उर्फ टिल्लू की तलाश अब दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की खुदाई तक पहुँच गई है। 12 दिनों से जारी इस महा-सर्च ऑपरेशन में प्रशासन ने पानी की तरह पैसा बहा दिया है, लेकिन अब तक जमीन के नीचे दफन 'राज' बाहर नहीं आ पाया है।

12 दिन की खुदाई और ₹50 लाख का भारी भरकम खर्च

मासूम प्रिंस के अवशेषों को खोजने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे हाई-टेक हाईवे के एक हिस्से को 12 दिनों से खोदा जा रहा है।

भारी मशीनरी का इस्तेमाल: खुदाई के लिए अत्याधुनिक मिलिंग मशीन और स्वीडन निर्मित GPR (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार) का उपयोग किया जा रहा है।

लाखों का बिल: खबरों के मुताबिक, खुदाई में इस्तेमाल होने वाली मशीनों का किराया और ऑपरेशन का कुल खर्च अब तक ₹50 लाख के आंकड़े को छू रहा है। इसके बावजूद, अब तक केवल मिट्टी और पत्थर ही हाथ लगे हैं।

सगे चाचा-चाची ही निकले कातिल, 6 साल तक साथ रहकर बहाते रहे आंसू

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिन लोगों ने प्रिंस की हत्या की, वे कोई और नहीं बल्कि उसके सगे चाचा अनिल और चाची कृष्णा थे।

** betrayal (विश्वासघात):** हत्या के बाद दोनों आरोपी परिवार के साथ मिलकर प्रिंस को ढूंढने का नाटक करते रहे।

एक्सप्रेसवे के नीचे दफनाया शव: आरोपियों ने कबूल किया है कि उन्होंने 2020 में हत्या के बाद मासूम के शव को निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे की मिट्टी में दफना दिया था। इसके बाद ऊपर से हाईवे की 12-15 फीट ऊंची परतें चढ़ गईं।

हाई-टेक तकनीक से 'अदृश्य' सुराग की तलाश

पुलिस इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। जयपुर और दिल्ली से मंगाई गई GPR मशीन ने जमीन के अंदर करीब 9 मीटर गहराई तक संदिग्ध सिग्नल पकड़े हैं।

ड्रोन सर्वे: 2020 के पुराने ड्रोन मैप्स और आज के नक्शों का मिलान किया जा रहा है ताकि सही स्पॉट का पता लगाया जा सके।

ट्रैफिक डायवर्जन: सर्च ऑपरेशन के कारण दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की 3 लेन को बंद करना पड़ा है, जिससे वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।

दुबई से लौटा बेबस पिता, अब सिर्फ इंसाफ की उम्मीद

प्रिंस के पिता जगमोहन बैरवा, जो दुबई में नौकरी करते थे, 21 फरवरी को इस खुदाई की खबर सुनकर गांव लौट आए। उन्होंने पिछले 6 सालों में अपने बेटे को ढूंढने के लिए देशभर की खाक छानी और करीब ₹10 लाख खर्च किए। आज वे नम आंखों से अपनी जमीन और उस हाईवे को देख रहे हैं, जिसके नीचे शायद उनके बेटे का वजूद दबा हुआ है।