Rajasthan Job : 0 नंबर वाले को सरकारी नौकरी? यह कैसा मजाक है, राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकार को लताड़ा चतुर्थ श्रेणी भर्ती पर लगाई रोक

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News India Live, Digital Desk : राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) ने सरकारी भर्तियों में 'जीरो कट-ऑफ' (Zero Cut-off) को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों (Class-4 Employees) की भर्ती प्रक्रिया में उन उम्मीदवारों को शामिल करने पर सवाल उठाए हैं, जिन्होंने प्रवेश परीक्षा में शून्य अंक प्राप्त किए थे।

हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की चयन प्रक्रिया शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक ढांचे का मजाक उड़ाती है।

"क्या बिना योग्यता के चलेगी सरकार?" - कोर्ट का कड़ा सवाल

एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति की पीठ ने नाराजगी जताते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा कि आखिर किस आधार पर ऐसे उम्मीदवारों को नौकरी दी जा रही है जिनके पास न्यूनतम योग्यता या अंक भी नहीं हैं।

विवाद की जड़: चतुर्थ श्रेणी भर्ती में कई आरक्षित श्रेणियों के लिए कट-ऑफ को 'शून्य' कर दिया गया था।

अदालत की टिप्पणी: कोर्ट ने कहा कि जीरो कट-ऑफ से न केवल योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होता है, बल्कि यह सरकारी संस्थानों की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है।

भर्ती प्रक्रिया पर 'स्टे' और सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

हाई कोर्ट ने फिलहाल इस भर्ती प्रक्रिया के तहत होने वाली नियुक्तियों पर रोक (Stay) लगा दी है। कोर्ट ने मुख्य सचिव और संबंधित विभाग को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अदालत जानना चाहती है कि चयन के लिए कोई न्यूनतम अंक (Minimum Qualifying Marks) क्यों नहीं रखे गए।

युवाओं में आक्रोश: योग्यता बनाम आरक्षण की बहस

राजस्थान के बेरोजगार युवाओं के बीच भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई अभ्यर्थियों का तर्क है कि चतुर्थ श्रेणी भर्ती हो या कोई और, एक न्यूनतम मानक होना अनिवार्य है। सोशल मीडिया पर भी 'जीरो कट-ऑफ' को लेकर सरकार की आलोचना हो रही है। छात्रों का कहना है कि जब चपरासी और स्वीपर जैसे पदों के लिए ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट युवा लाइन में लगे हैं, तो जीरो नंबर वाले का चयन सिस्टम की विफलता है।

क्या होगा आगे? अब सरकार के पास क्या हैं विकल्प

अब गेंद राजस्थान सरकार के पाले में है। सरकार को हाई कोर्ट में यह साबित करना होगा कि यह नियम कानून के दायरे में है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद सरकार को अपनी भर्ती नियमावली (Recruitment Rules) में बदलाव करना पड़ सकता है और भविष्य की सभी भर्तियों के लिए 'न्यूनतम उत्तीर्णांक' तय करने पड़ सकते हैं।