उदयपुर के मेनार में रंग नहीं, बरसता है बारूद तोपों की गूंज और बंदूकों की कड़क के साथ मनाई जाती है मुगलों पर जीत की अनोखी होली
News India Live, Digital Desk: राजस्थान के उदयपुर (Udaipur) जिले का मेनार गांव होली के दिन किसी युद्ध के मैदान में तब्दील हो जाता है। यहाँ गुलाल और पानी से नहीं, बल्कि बंदूकों, तोपों और बारूद से होली खेली जाती है। आज (5 मार्च 2026) जमरा बीज के अवसर पर यहाँ सदियों पुरानी 'बारूद की होली' का भव्य आयोजन किया गया, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक पहुँचे।
रंगों की जगह बारूद का खेल: क्यों है यह परंपरा खास?
मेनार गांव में ब्राह्मण समुदाय (मेनारिया ब्राह्मण) द्वारा निभाई जाने वाली यह परंपरा शौर्य और विजय का प्रतीक है। होली की रात यहाँ ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा सफेद धोती-कुर्ता और लाल पगड़ी पहनकर हाथों में बंदूकें और तलवारें लेकर निकलते हैं।
आतिशबाजी का नजारा: जैसे ही ढोल की थाप बजती है, हवा में बंदूकों से फायर किए जाते हैं और आसमान बारूद के धुएं और रोशनी से भर जाता है।
युद्ध जैसा माहौल: पूरे गांव में मशालें जलाई जाती हैं और लोग रणबांकुरों की तरह युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हैं।
मुगलों पर जीत का जश्न: 400 साल पुराना इतिहास
इस अनोखी होली के पीछे अदम्य साहस की कहानी छिपी है।
मान्यता है कि महाराणा प्रताप के काल में मुगलों ने मेनार गांव के पास अपनी चौकियां बनाई थीं। तब मेनारिया ब्राह्मणों ने अपनी बुद्धि और वीरता से मुगलों की सेना पर हमला कर उन्हें धूल चटाई थी। उस ऐतिहासिक जीत की याद में हर साल यहाँ 'बारूद की होली' मनाई जाती है।
लाल जाजम और गैर नृत्य का आकर्षण
उत्सव के दौरान गांव के चौक में एक 'लाल जाजम' बिछाई जाती है, जहाँ बुजुर्ग और युवा मिलकर चर्चा करते हैं। इसके बाद 'गैर नृत्य' शुरू होता है। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच जब तलवारें आपस में टकराती हैं और बंदूकों से सलामी दी जाती है, तो देखने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह आयोजन उनके पूर्वजों के बलिदान को याद करने और युवा पीढ़ी में वीरता के संस्कार भरने का जरिया है।
सुरक्षा के बीच उमड़ा जनसैलाब
इस आयोजन की लोकप्रियता इतनी है कि प्रशासन को सुरक्षा के विशेष इंतजाम करने पड़ते हैं। बारूद और बंदूकों का इस्तेमाल होने के बावजूद, ग्रामीण इसे इतनी कुशलता से अंजाम देते हैं कि आज तक कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई है। यह परंपरा सांप्रदायिक सौहार्द और गौरवशाली राजस्थानी संस्कृति का एक अनूठा उदाहरण पेश करती है।