Rajasthan Forest : परिंदों के प्रति ये कैसी बेरुखी? डीडवाना में मोरों की रहस्यमयी मौत और वन विभाग की बढ़ती बेचैनी

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News India Live, Digital Desk : सर्दियों की सुबह अक्सर सुखद होती है, लेकिन डीडवाना के पास रहने वाले लोगों के लिए पिछले कुछ दिन थोड़े भारी गुजरे हैं। खेतों और बागों में जहां मोरों की आवाजें गूँजती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। खबर आई है कि पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में मोर मृत पाए गए हैं। जैसे ही इसकी जानकारी फैली, वन विभाग की टीमें हरकत में आईं और मामले की जांच शुरू कर दी गई।

आखिर मौत की वजह क्या हो सकती है?

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के मन में कई सवाल तैर रहे हैं। अक्सर इस मौसम में पक्षियों में 'रानीखेत' या किसी विशेष वायरस का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में एक अंदेशा यह भी जताया जा रहा है कि शायद फसलों में छिड़के गए कीटनाशक या जहरीले दाने इन बेकसूर परिंदों की जान ले रहे हों। डीडवाना के वन अधिकारी फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं, ताकि मौतों की असल वजह साफ हो सके।

वन विभाग का सख्त स्टैंड

प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गश्त बढ़ा दी है। डॉक्टरों की टीम ने मोरों के सैम्पल लिए हैं जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि वे पक्षियों के आने-जाने वाली जगहों पर किसी भी तरह के रसायनों का इस्तेमाल सावधानी से करें। 2026 की शुरुआत में ही वन्यजीवों के प्रति ऐसी लापरवाही ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी

मोर सिर्फ एक पक्षी नहीं है, वह हमारे पर्यावरण का एक अहम हिस्सा और हमारी संस्कृति का प्रतीक है। अगर डीडवाना जैसे इलाकों में इनकी आबादी इसी तरह कम होने लगी, तो प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने में देर नहीं लगेगी। ऐसे समय में हमें भी अपनी आंखों और कान खुले रखने की जरूरत है। अगर आपको कहीं कोई घायल या बीमार पक्षी दिखे, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें।

अंत में सवाल यही है कि क्या हम अपने विकास और खेती की दौड़ में उन मासूम जीवों को भूलते जा रहे हैं जिनकी मौजूदगी से यह धरती खूबसूरत है? डीडवाना की यह घटना हम सबके लिए एक बड़ी चेतावनी है।