मेटावर्स का सपना पड़ा भारी, मेटा ने Reality Labs से 1000 से ज़्यादा कर्मचारियों को क्यों निकाला?

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News India Live, Digital Desk: पिछले कुछ सालों से अगर आप टेक जगत (Tech World) पर नजर रख रहे हैं, तो आपने गौर किया होगा कि छंटनी का यह दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा (Meta), जिसे हम फेसबुक के नाम से भी जानते हैं, ने साल 2026 में एक और बड़ा फैसला लिया है। कंपनी के खास Reality Labs डिवीजन से 1000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है।

अब आप सोच रहे होंगे कि Reality Labs में ही छंटनी क्यों? तो बता दें कि यह वही विभाग है जो वर्चुअल रियलिटी (VR), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और जुकरबर्ग के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'मेटावर्स' पर काम कर रहा था।

ये छंटनी आख़िर क्यों हुई? (अंदर की बात)
मेटा का कहना है कि वे एक 'Strategic Shift' (रणनीतिक बदलाव) से गुजर रहे हैं। सरल भाषा में कहें तो, जिस रफ्तार और निवेश की उम्मीद जुकरबर्ग ने मेटावर्स से की थी, वह ज़मीनी हकीकत में तब्दील नहीं हो पाई। पिछले कुछ समय से कंपनी पर मुनाफा बढ़ाने का दबाव था, और मेटावर्स प्रोजेक्ट फिलहाल घाटे का सौदा साबित हो रहा था। अब मेटा अपना ध्यान शायद AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और दूसरे प्रॉफिटेबल प्रोजेक्ट्स की तरफ मोड़ रही है।

कर्मचारियों के लिए कितना बड़ा झटका?
यह सिर्फ एक नंबर 1000 नहीं है। यह उन प्रतिभावान इंजीनियरों और डेवलपर्स की कहानी है जिन्होंने अपना करियर उस भविष्य को बनाने में लगा दिया था जिसका वादा खुद जुकरबर्ग ने किया था। आज के समय में जब पूरी दुनिया महंगाई से जूझ रही है, टेक जायंट्स (Tech Giants) से अचानक निकलने वाले 'Layoff' ईमेल कर्मचारियों की रातों की नींद उड़ा देते हैं।

आगे का रास्ता क्या है?
देखा जाए तो यह छंटनी पूरी टेक इंडस्ट्री को एक संदेश दे रही है अब कंपनियां सिर्फ विज़न के आधार पर अरबों डॉलर नहीं फूंकना चाहतीं। अब जमाना 'इफिशिएंसी' (Efficiency) का है। मेटा ने भले ही Reality Labs को थोड़ा समेटने का फैसला लिया हो, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि प्रोजेक्ट पूरी तरह बंद हो गया है, बस उसकी रफ़्तार अब कम होगी।

सच्चाई तो ये है कि टेक की दुनिया अब उतनी सिक्योर नहीं रही जितनी कुछ साल पहले महसूस होती थी। उम्मीद है कि जिन लोगों ने अपनी नौकरी खोई है, उन्हें जल्द ही नई जगह मिले जहाँ उनकी स्किल्स की कद्र हो सके।