यूपी में फिर लौटने वाली है वो हाड़ कंपाने वाली गलन, 22 शहरों में पारा 7 डिग्री के नीचे पहुँचा

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News India Live, Digital Desk : अगर आप भी पिछले दो-तीन दिनों की धूप देखकर यह सोच रहे थे कि अब स्वेटर और कंबल पैक करने का समय आ गया है, तो जरा रुक जाइए। उत्तर प्रदेश के मौसम ने एक बार फिर ऐसी पलटी मारी है कि लोगों की हड्डियाँ कांपने लगी हैं। ऐसा लग रहा है मानो ठंड का 'दूसरा राउंड' शुरू हो गया हो।

ताजा रिपोर्ट की मानें तो प्रदेश के करीब 22 शहरों में पारा 7 डिग्री सेल्सियस से नीचे लुढ़क गया है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का सीधा असर अब हमारे मैदानी इलाकों में दिखने लगा है। ठंडी पछुआ हवाओं ने सुबह और शाम के वक्त ऐसी 'गलन' पैदा कर दी है कि बाहर निकलना भी एक चुनौती बन गया है।

किन शहरों में है सबसे ज्यादा बुरा हाल?
उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहर इस समय शीतलयहर की चपेट में हैं। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वी यूपी तक ठंड का कहर जारी है। मेरठ, बरेली, मुजफ्फरनगर और मुरादाबाद जैसे इलाकों में तो स्थिति यह है कि पारा 4 से 5 डिग्री के आसपास मंडरा रहा है। वहीं लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में भी रातें और सुबह बेहद ठंडी हो गई हैं। सूरज निकलता तो है, लेकिन बर्फीली हवाओं के आगे उसकी तपिश बेअसर साबित हो रही है।

कोहरे ने भी बढ़ाई परेशानी
ठंड तो एक तरफ, ऊपर से सुबह के समय छाये रहने वाले घने कोहरे (Dense Fog) ने सड़क पर चलने वालों की मुसीबत और बढ़ा दी है। विजिबिलिटी इतनी कम हो जाती है कि हेडलाइट जलाने के बाद भी कुछ दूर का दिखाई नहीं देता। ट्रेनें और बसें अपने तय समय से देरी से चल रही हैं, जिससे आम मुसाफिरों की फजीहत हो रही है।

पहाड़ों का क्या है कनेक्शन?
मौसम विभाग की मानें तो जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में हो रहे 'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' की वजह से बर्फीली हवाएँ नीचे की ओर रुख कर रही हैं। जब तक पहाड़ों पर मौसम साफ नहीं होता, तब तक मैदानी इलाकों में राहत की उम्मीद कम ही दिख रही है। आने वाले दो-तीन दिनों में गलन और बढ़ने की संभावना जताई गई है।

मेरी छोटी सी सलाह:
ये वही मौसम है जब सर्दी-जुकाम और बुखार सबसे जल्दी हमें अपनी चपेट में लेता है। सुबह और रात को बाहर निकलते समय कान और गला ज़रूर ढंक कर रखें। गुनगुने पानी का सेवन जारी रखें और अगर बहुत ज़रूरी न हो, तो कोहरे के वक्त यात्रा करने से बचें।

तो कुल मिलाकर, यूपी में 'कड़ाके की ठंड' की वापसी हो गई है। अपनी रजाई का मोह अभी मत छोड़िए, क्योंकि ठंड ने अभी बाय-बाय नहीं कहा है!