राशन की हेराफेरी पर अब AI की पैनी नज़र, सीएम योगी का वो फैसला जिससे माफियाओं में मची है खलबली

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News India Live, Digital Desk : आपने गौर किया होगा कि यूपी के राशन दफ्तरों और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में पहले से बेहतर हुई है। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसे अगले लेवल पर ले जाने की तैयारी में हैं। उनका साफ कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कोई अमीरों का खिलौना नहीं है, बल्कि यह एक आम गरीब की थाली का राशन बचाने और उसके बच्चों की सेहत सुधारने का सबसे बड़ा जरिया है।

राशन चोरी का होगा अंत
यूपी में राशन माफियाओं और राशन वितरण में होने वाली हेराफेरी पुरानी समस्या रही है। अक्सर राशन का हकदार गरीब कहीं रह जाता था और उसका हक कहीं और चला जाता था। सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि अब AI का इस्तेमाल राशन वितरण को ट्रैक करने के लिए किया जाएगा। अब तकनीक खुद तय करेगी कि किस शख्स को उसका पूरा हक मिला है या नहीं। कोई भी मशीन में डेटा के साथ गड़बड़ नहीं कर पाएगा, यानी अब "फर्जीवाड़ा" बीते दौर की बात हो जाएगी।

मासूमों की जान बचाएगी टेक्नोलॉजी
पूर्वी उत्तर प्रदेश (खासकर गोरखपुर इलाका) के लिए 'इंसेफेलाइटिस' (दिमागी बुखार) एक बड़ा दर्द रहा है। सालों तक हजारों बच्चों ने इस बीमारी की वजह से अपनी जान गंवाई। योगी आदित्यनाथ ने बताया कि सरकार अब AI के डेटा एनालिसिस की मदद से इस बीमारी को पूरी तरह खत्म करने की योजना बना रही है। यह तकनीक पहले से अंदाजा लगा लेगी कि कहाँ इन्फेक्शन बढ़ सकता है और किस इलाके में सबसे पहले दवाएं और डॉक्टर्स भेजने की ज़रूरत है।

स्मार्ट गवर्नेंस की ओर कदम
सीएम योगी का कहना है कि प्रशासन के काम में अगर इंसानी हस्तक्षेप कम होगा और तकनीक ज़्यादा होगी, तो भ्रष्टाचार अपने आप कम हो जाएगा। फाइलें अटकेंगी नहीं और सही समय पर फैसले लिए जा सकेंगे। स्वास्थ्य से लेकर खेती तक और शिक्षा से लेकर पुलिस प्रशासन तक, यूपी में अब AI का दखल बढ़ने वाला है।

सच कहें तो, यूपी जैसे बड़े राज्य में जब तकनीक इतनी गहराई से ज़मीनी हकीकतों से जुड़ती है, तो वह सिर्फ़ 'डिजिटल इंडिया' का नारा नहीं रह जाती, बल्कि लोगों के जीवन का आधार बन जाती है। आने वाले समय में देखना होगा कि यूपी के गांवों और शहरों में AI की ये दस्तक कितनी रफ़्तार पकड़ती है।