आधी रात को बार-बार पेशाब के लिए उठना कोई सामान्य बात नहीं, जानिए शरीर आपको क्या इशारा दे रहा है
News India Live, Digital Desk : बात थोड़ी संजीदा है, और शायद हममें से बहुत से पुरुष इस पर खुलकर बात करना भी पसंद नहीं करते। अक्सर देखा गया है कि प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ी दिक्कतों को लोग "बूढ़ा होने के साथ तो ऐसा होता ही है" कहकर टाल देते हैं। लेकिन ये 'टालना' कभी-कभी काफी महंगा पड़ जाता है।
अगर हम और आप थोड़े से जागरूक हों, तो समय रहते न केवल इस बीमारी को पकड़ा जा सकता है, बल्कि इसका सफल इलाज भी मुमकिन है। चलिए, देखते हैं कि शरीर आखिर वो कौन सी बातें है जो दबी जुबां में कहना चाह रहा है।
1. यूरिन (पेशाब) करने के तरीके में बदलाव
क्या आपने महसूस किया है कि पेशाब शुरू करने में दिक्कत होती है या इसकी धार काफी कमज़ोर पड़ गई है? अगर यूरिन रुक-रुक कर आ रहा है या ऐसा लगता है कि पेट पूरी तरह साफ़ नहीं हुआ है, तो यह प्रोस्टेट के बढ़ जाने का पहला संकेत हो सकता है। यह ग्रंथि पेशाब की नली के चारों ओर होती है, इसलिए इसमें कोई भी गड़बड़ी सीधे हमारे बाथरूम रूटीन पर असर डालती है।
2. रात को बार-बार उठना
रात भर चैन से सोने के बजाय अगर आपको दो या तीन बार पेशाब के लिए उठना पड़ रहा है, तो इसे नज़रअंदाज़ मत कीजिए। हम इसे 'नींद की कमी' समझते हैं, जबकि यह इशारा प्रोस्टेट में आ रही किसी गाँठ या समस्या की तरफ भी हो सकता है।
3. यूरिन या सीमेन में खून का दिखना
ये एक 'रेड सिग्नल' की तरह है। अगर कभी भी पेशाब में या सीमेन में खून के हल्के दाग दिखें, तो बिना एक मिनट भी गंवाए अपने डॉक्टर (यूरोलॉजिस्ट) से बात करनी चाहिए। यह सिर्फ कैंसर ही नहीं, बल्कि इन्फेक्शन का भी संकेत हो सकता है, लेकिन इसका इलाज बहुत ज़रूरी है।
4. पेल्विक हिस्से और हड्डियों में दर्द
प्रोस्टेट का कैंसर अगर धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, तो कई बार कूल्हों, पीठ के निचले हिस्से या जांघों में एक सुस्त सा दर्द बना रहता है। बहुत से पुरुष इसे सिर्फ़ थकान या कमजोरी मानकर दर्द निवारक गोलियां (Painkillers) खाने लगते हैं। याद रखिये, बेवजह हड्डियों का दर्द बिना किसी चोट के हो, तो डॉक्टर की राय ज़रूरी है।
5. एकदम से पेशाब आना (Urgency)
कई बार अचानक ऐसा लगता है कि अब यूरिन रोकना नामुमकिन है और आपको भागकर बाथरूम जाना पड़ता है। इसे 'कंट्रोल न रह पाना' भी कहते हैं। अगर ऐसा दिन में कई बार हो रहा है, तो समझ लीजिए कि प्रोस्टेट ग्रंथि पर किसी तरह का दबाव पड़ रहा है।
सीधी बात ये है...
प्रोस्टेट कैंसर का मतलब ये नहीं कि दुनिया खत्म हो गई। अगर उम्र 50 से ज़्यादा है (या घर में किसी को यह पहले रहा हो), तो समय-समय पर PSA टेस्ट (एक ब्लड टेस्ट) कराते रहना चाहिए। यह डराने के लिए नहीं, बल्कि बेफिक्र होकर जीने के लिए एक सावधानी है।
शरीर की आवाज़ को अनसुना मत कीजिए। समय रहते डॉक्टर से मिलने में कोई शर्म नहीं है—सावधानी ही सेहत का सबसे बड़ा साथी है।