सचिन पायलट पर कांग्रेस ने खेला बड़ा दांव ,राजस्थान के बाद अब क्या केरल में दिखाएंगे अपना पायलट वाला जादू?

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News India Live, Digital Desk: राजस्थान की राजनीति में जब भी कोई बड़ी हलचल होती है, तो 'सचिन पायलट' का नाम सबसे पहले गूंजता है। लेकिन इस बार चर्चा राजस्थान के जयपुर या जोधपुर की नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के खूबसूरत राज्य केरल की है। 2026 के चुनावी समर (As per 2026 timeline) में कांग्रेस ने एक ऐसा दांव खेला है जिसने राजनीतिक जानकारों को भी हैरान कर दिया है।

पार्टी आलाकमान ने सचिन पायलट को केरल विधानसभा चुनाव के लिए 'सीनियर ऑब्जर्वर' (Senior Observer) के रूप में तैनात किया है। आसान भाषा में कहें तो केरल में पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार करने और बिखरे हुए मोहरों को समेटने की पूरी कमान अब पायलट के हाथों में होगी।

आख़िर पायलट ही क्यों?
सवाल उठना लाजमी है कि राजस्थान के एक नेता को दक्षिण में इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों दी गई? इसके पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। कांग्रेस अब अपने युवा और ऊर्जावान चेहरों को राज्यों की सीमाओं से बाहर निकालकर 'नेशनल ब्रांड' के तौर पर पेश करना चाहती है। सचिन पायलट की युवाओं के बीच जबरदस्त पकड़ और शांत स्वभाव उन्हें केरल के पढ़े-लिखे वोटर्स के साथ कनेक्ट करने में मदद कर सकता है। दिल्ली में बैठी कांग्रेस की 'कमान' को लगता है कि पायलट का चेहरा साउथ की गुटीय राजनीति को शांत करने में 'मरहम' जैसा काम कर सकता है।

क्या केरल की पिच पर जमेंगे पैर?
केरल की राजनीति राजस्थान से बिल्कुल अलग है। यहाँ के मुद्दे अलग हैं, भाषा अलग है और वोटर्स का मिजाज भी एकदम हटके है। ऐसे में सचिन पायलट के सामने यह एक बड़ी परीक्षा की तरह है। उन्हें वहां के दिग्गज नेताओं के साथ तालमेल बिठाना होगा और जनता को यह समझाना होगा कि क्यों कांग्रेस ही उनका बेहतर विकल्प है। यह मिशन उनके लिए सिर्फ एक चुनावी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अपनी 'लीडरशिप' को राष्ट्रीय स्तर पर साबित करने का सुनहरा मौका है।

राजनैतिक गलियारों में नई सुगबुगाहट
पायलट को इस तरह की जिम्मेदारी मिलने के बाद राजस्थान की सियासत में भी हलचल तेज हो गई है। लोग पूछ रहे हैं कि—क्या दिल्ली का ये भरोसा राजस्थान के सियासी समीकरणों को बदलने का कोई संकेत है? खैर, वो तो बाद की बात है, लेकिन फिलहाल 8 जनवरी 2026 की इस ताज़ा अपडेट के साथ पायलट 'मिशन केरल' पर निकल चुके हैं।