Rajasthan Education Crisis: बाड़मेर में शिक्षा पर संकट हजारों बच्चों ने छोड़ा स्कूल, IAS टीना डाबी के नवो बाड़मेर मिशन से लौटेगी रौनक?
News India Live, Digital Desk: राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर में शिक्षा की स्थिति चिंताजनक मोड़ पर पहुँच गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, जिले के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में स्कूल ड्रॉपआउट रेट में भारी उछाल देखा गया है। विशेषकर लड़कियों और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के बच्चे माध्यमिक शिक्षा पूरी करने से पहले ही स्कूल से किनारा कर रहे हैं। इस संकट को देखते हुए जिला कलेक्टर टीना डाबी ने 'नवो बाड़मेर' अभियान के तहत शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।
क्यों खाली हो रहे हैं रेगिस्तान के स्कूल? (मुख्य कारण)
रेगिस्तानी इलाकों में शिक्षा के मार्ग में कई प्राकृतिक और सामाजिक बाधाएं हैं:
दूरी और परिवहन: कई गांवों से स्कूल 5 से 10 किलोमीटर दूर हैं। परिवहन के साधनों की कमी के कारण बच्चे, खासकर लड़कियां, स्कूल जाना बंद कर देती हैं।
पलायन और मजदूरी: सूखे और रोजगार की तलाश में परिवारों का पलायन बच्चों की पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा है। छोटे बच्चे अक्सर अपने माता-पिता के साथ मजदूरी में हाथ बंटाने के लिए मजबूर होते हैं।
शिक्षकों की कमी: सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है।
IAS टीना डाबी का 'मास्टरप्लान': कैसे सुधरेगी स्थिति?
कलेक्टर टीना डाबी ने बाड़मेर की कमान संभालने के बाद शिक्षा और स्वच्छता को अपनी प्राथमिकता बनाया है। उनके 'नवो बाड़मेर' मिशन के तहत ये कदम उठाए जा रहे हैं:
डोर-टू-डोर सर्वे: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों के माध्यम से ड्रॉपआउट बच्चों की सूची तैयार कर उन्हें दोबारा स्कूल लाने (Re-enrollment) का प्रयास।
सुविधाओं का विस्तार: स्कूलों में बिजली, पानी और विशेषकर लड़कियों के लिए अलग शौचालयों का निर्माण सुनिश्चित करना।
जागरूकता अभियान: 'लाडो' (बेटियों) को स्कूल भेजने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
नवो बाड़मेर लाइब्रेरी: ग्राम पंचायत स्तर पर आधुनिक लाइब्रेरी और रीडिंग रूम बनाने की योजना ताकि बच्चों को पढ़ाई के लिए सही माहौल मिल सके।
बाड़मेर vs जैसलमेर: शिक्षा का बदलता परिदृश्य
जैसलमेर में कलेक्टर रहते हुए टीना डाबी ने 'लेडीज फर्स्ट' और स्वच्छता अभियानों से जो बदलाव लाया था, वैसी ही उम्मीद अब बाड़मेर की जनता को है। बाड़मेर में साक्षरता दर को बढ़ाना और ड्रॉपआउट को शून्य पर लाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यहाँ की भौगोलिक परिस्थितियाँ जैसलमेर से भी अधिक जटिल हैं।