Raigarh Industrial Disaster : रायगढ़ के मंगल कार्बन प्लांट में बॉयलर फटा, मासूम समेत 8 मजदूर गंभीर रूप से झुलसे
News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ का औद्योगिक जिला रायगढ़ एक बार फिर धमाके की आवाज से दहल उठा। खरसिया के बानीपाथर स्थित मंगल कार्बन टायर फैक्ट्री में टायर गलाने की प्रक्रिया के दौरान गैस टैंक या बॉयलर में अचानक विस्फोट हो गया। इस हादसे में फैक्ट्री परिसर में मौजूद 9 महीने के मासूम बच्चे सहित 8 मजदूर बुरी तरह झुलस गए हैं।
हादसे का घटनाक्रम (The Incident)
हादसा उस वक्त हुआ जब प्लांट में पुराने टायरों को गलाकर उनसे कार्बन और तेल निकालने का काम चल रहा था।
जोरदार विस्फोट: अचानक बॉयलर में दबाव बढ़ने से एक भीषण धमाका हुआ, जिसकी आवाज 1-2 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी।
आग का गोला: धमाके के साथ ही प्लांट से गर्म गैस और आग की लपटें निकलीं, जिन्होंने पास में काम कर रहे मजदूरों और वहां मौजूद उनके परिवार के सदस्यों को अपनी चपेट में ले लिया।
घायलों की स्थिति: मासूम की हालत नाजुक
विस्फोट के तुरंत बाद घायलों को खरसिया के सिविल अस्पताल और फिर रायगढ़ जिला अस्पताल रेफर किया गया।
गंभीर रूप से झुलसे: डॉक्टरों के अनुसार, घायल मजदूर 25% से 80% तक झुलस चुके हैं।
मासूम बच्चा: सबसे दुखद पहलू यह है कि एक 9 महीने का मासूम बच्चा भी इस आग की चपेट में आ गया है, जिसकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।
मजदूरों की पहचान: झुलसे हुए मजदूरों में अधिकांश बाहरी राज्यों (बिहार और उत्तर प्रदेश) के बताए जा रहे हैं, जो फैक्ट्री परिसर में ही बने शेड में रहते थे।
जांच और सुरक्षा पर सवाल
हादसे के बाद पुलिस और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग (IHSD) की टीम मौके पर पहुँच गई है। प्रारंभिक जांच में कुछ गंभीर खामियां सामने आई हैं:
तकनीकी खराबी: प्राथमिक तौर पर बॉयलर में प्रेशर रेगुलेटर के काम न करने को विस्फोट की वजह माना जा रहा है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे और मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरणों (Safety Gears) के काम पर रखा गया था।
रिहायशी शेड: फैक्ट्री के अंदर ही मजदूरों के परिवारों और बच्चों का रहना सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है।
रायगढ़ में बढ़ते औद्योगिक हादसे
यह घटना रायगढ़ जिले में लगातार हो रहे औद्योगिक हादसों की कड़ी में एक और नाम है। हाल ही में श्रम न्यायालय ने सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर जिले की 6 बड़ी कंपनियों पर ₹10 लाख से अधिक का जुर्माना भी लगाया था, लेकिन छोटे प्लांटों में अभी भी लापरवाही का खेल जारी है।