बीजापुर में बड़ी कामयाबी 46 लाख रुपये के 12 इनामी माओवादियों ने किया सरेंडर, लोन वर्राटू अभियान का दिखा असर

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News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 12 सक्रिय माओवादियों ने पुलिस और CRPF के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। इन सभी सरेंडर करने वाले माओवादियों पर कुल मिलाकर ₹46 लाख का इनाम घोषित था।

1. मुख्यधारा में वापसी (The Surrender)

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में कई हार्डकोर कैडर शामिल हैं जो लंबे समय से बस्तर के जंगलों में सक्रिय थे।

इनामी राशि: इनमें से कुछ माओवादी ₹8 लाख और ₹5 लाख जैसे भारी इनामी श्रेणी के थे।

समर्पण की वजह: माओवादियों ने बताया कि वे संगठन की खोखली विचारधारा, भेदभाव और पुलिस के बढ़ते 'कैंप' (Camp) के कारण अलग-थलग पड़ गए थे। साथ ही, छत्तीसगढ़ सरकार की 'नई पुनर्वास नीति' ने उन्हें सुरक्षित जीवन का भरोसा दिया।

2. 'लोन वर्राटू' और 'नियद नेल्लानार' का प्रभाव

बीजापुर पुलिस द्वारा चलाया जा रहा 'लोन वर्राटू' (घर वापस आइये) अभियान रंग ला रहा है। इसके तहत अब तक सैकड़ों माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

विकास कार्य: 'नियद नेल्लानार' (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत अंदरूनी इलाकों में सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं पहुंचने से माओवादियों का जनाधार कम हो रहा है।

3. आत्मसमर्पित माओवादियों को लाभ

पुनर्वास नीति के तहत इन सभी को तत्काल सहायता प्रदान की गई है:

तात्कालिक सहायता: प्रत्येक को ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि दी गई।

भविष्य की योजना: सरकार इन पूर्व माओवादियों को घर बनाने के लिए जमीन, बच्चों की शिक्षा और स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।

4. सुरक्षा बलों का बयान

बीजापुर एसपी और सीआरपीएफ के अधिकारियों ने कहा कि यह आत्मसमर्पण नक्सलियों के बैकफुट पर होने का प्रमाण है। उन्होंने अन्य सक्रिय नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हों, अन्यथा उन्हें मुठभेड़ का सामना करना पड़ेगा।