बहराइच से लखनऊ तक भ्रष्टाचार की गूँज, जल जीवन मिशन में ₹5 करोड़ का खेल? पैदल मार्च के बाद जागा प्रशासन

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ तेजवापुर ब्लॉक की आधा दर्जन ग्राम सभाओं में 'जल जीवन मिशन' के तहत हुए कार्यों में करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों ने आर-पार की जंग छेड़ दी है। ग्राम पंचायत बालासराय के मेला पुरवा में चल रहे धरने के दूसरे दिन ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया और वे मुख्यमंत्री से गुहार लगाने के लिए पैदल ही लखनऊ की ओर निकल पड़े।

5 साल, 5 करोड़ और नतीजा 'शून्य'

ग्रामीणों का आरोप है कि बालासराय, रमपुरवा, सुरजना, ऊंचगांव और उदवापुर ग्राम सभाओं में पानी की टंकियां और पाइपलाइन बिछाने के नाम पर ₹5 करोड़ से अधिक खर्च कर दिए गए। लेकिन हकीकत यह है कि 5 साल बीत जाने के बाद भी घरों के नल सूखे पड़े हैं। ग्रामीणों के अनुसार:

सरकारी दस्तावेजों में काम 100% पूरा दिखाया गया है।

जमीनी हकीकत में टंकियां केवल 'शोपीस' बनकर रह गई हैं।

पाइपलाइन बिछाने में भी भारी अनियमितता का आरोप है।

पैदल मार्च और पुलिस से तीखी नोकझोंक

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रोहित दीक्षित और दर्जनों ग्रामीण जब लखनऊ के लिए रवाना हुए, तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। हरदी थाना पुलिस ने तिकोरामोड़ पर ग्रामीणों को रोकने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ग्रामीणों की जिद और मुख्यमंत्री से मिलने के संकल्प के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। देर रात तहसीलदार महसी और अन्य अधिकारियों ने ग्रामीणों को जिलाधिकारी (DM) कार्यालय पहुँचाया।

प्रशासनिक एक्शन: CBI जांच की मांग और शुरू हुई जांच

जिलाधिकारी ने ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक उच्च स्तरीय जांच टीम गठित करने के आदेश दिए हैं।

रविवार सुबह ही जांच टीम मौके पर पहुँच गई है और पाइपलाइनों व टंकियों की भौतिक जांच शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे अब केवल आश्वासन से नहीं मानेंगे, उन्हें इस पूरे घोटाले की CBI जांच और दोषियों की गिरफ्तारी चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई केवल पानी की नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई के बंदरबांट के खिलाफ है। अब सबकी निगाहें जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं।