पटना की बेटी के लिए उठे सवाल पुलिस की थ्योरी पर भरोसा नहीं, अब चीफ जस्टिस से इंसाफ की गुहार
News India Live, Digital Desk: पटना के शास्त्रीनगर में हुई नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया है। पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या (Suicide) जैसा बताया, लेकिन जिस हालत में वो पाई गई, उससे बहुत सारे सवाल खड़े हो रहे हैं जो गले नहीं उतर रहे।
और अब यह लड़ाई थाने की चौखट से निकलकर मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission) और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक जा पहुंची है।
मामला आखिर है क्या?
हजारीबाग की रहने वाली यह छात्रा पटना के हॉस्टल में रहकर डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर रही थी। लेकिन अचानक उसके कमरे से उसकी संदिग्ध हालत में लाश मिली। हाथ-पैर बंधे होने जैसी बातें और परिस्थितियों को देखकर परिवार और सामाजिक कार्यकर्ता इसे "आत्महत्या" मानने को तैयार नहीं हैं। उनका आरोप है कि यह एक "सुनियोजित हत्या" (Planned Murder) है और पुलिस मामले को रफा-दफा कर रही है।
अब क्या नया हुआ है?
एक सामाजिक कार्यकर्ता, डॉ. एजाज अली ने इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
सिर्फ यही नहीं, उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना को भी पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने गुहार लगाई है कि सुप्रीम कोर्ट खुद इस मामले का संज्ञान ले (Suo Moto) और इसकी न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) या सीबीआई (CBI) जांच का आदेश दे।
क्यों है जांच जरूरी?
पत्र में साफ लिखा गया है कि हॉस्टल्स में रहने वाले छात्र-छात्राएं सुरक्षित नहीं हैं। अगर आज सच सामने नहीं आया, तो कल किसी और के साथ भी ऐसा हो सकता है। पुलिस की जांच पर उठते सवालों के बीच, अब सबकी निगाहें मानवाधिकार आयोग और अदालत पर टिकी हैं।
क्या उस बेटी को इंसाफ मिल पाएगा? या यह फाइल भी धूल फांकती रह जाएगी? हम सबको एक आवाज होकर सच की मांग करनी चाहिए।