चंडीगढ़ में बैन के बावजूद धड़ल्ले से दौड़ रही Uber-Rapido की बाइक टैक्सी

चंडीगढ़ में बैन के बावजूद धड़ल्ले से दौड़ रही Uber-Rapido की बाइक टैक्सी

देश के खूबसूरत और नियोजित शहर चंडीगढ़ (Chandigarh) से राइड-हेलिंग सेवाओं और यातायात व्यवस्था को लेकर एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाली जमीनी हकीकत सामने आ रही है। प्रशासनिक स्तर पर कड़े नियमों और सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए शहर में उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) जैसी प्रमुख कैब व बाइक टैक्सी कंपनियों के संचालन लाइसेंस पर छह महीने का प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद धरातल पर स्थिति यह है कि शहर की सड़कों और चौराहों पर इन कंपनियों की बाइक टैक्सियाँ अब भी धड़ल्ले से दौड़ती हुई नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की सख्त नजरों से बचने और भारी-भरकम जुर्माने या जब्ती की कार्रवाई से खुद को बचाने के लिए इन ड्राइवरों ने कई अनोखे और नए तरीके निकाल लिए हैं। एक तरफ जहां प्रशासन नियमों का पालन करवाने के लिए अपनी रणनीति बदल रहा है, वहीं दूसरी तरफ रोजगार बचाने की जद्दोजहद में जुटे ड्राइवर्स और पुलिस के बीच लुकाछिपी का यह खेल शहर में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।

चंडीगढ़ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: क्यों प्रतिबंधित की गईं उबर और रैपिडो जैसी राइड-हेलिंग सेवाएं और क्या है पूरा मामला

यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब चंडीगढ़ के स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर नियमों का पालन न करने, इंश्योरेंस से जुड़ी कमियों और कमर्शियल के बजाय प्राइवेट नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के धड़ल्ले से इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाया। प्रशासन का यह साफ कहना था कि नियमों को ताक पर रखकर शहर में बाइक टैक्सी चलाना यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है, जिसके बाद सुरक्षा और अनुपालन मानकों के तहत इन कंपनियों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। लाइसेंस रद्द होने और पाबंदी लगने के बाद यात्रियों की सुविधा के लिए तो विकल्प सीमित हो गए, लेकिन उन हजारों युवा ड्राइवर्स के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया जो इन ऐप्स के जरिए अपनी बाइक की किस्तें चुकाते थे और अपने परिवार का गुजर-बसर करते थे। इसी मजबूरी और मांग के चलते बैन लगने के बाद भी ड्राइवर्स ने अवैध रूप से इन सेवाओं को गुप्त तरीके से जारी रखना ही बेहतर समझा।

पुलिस से बचने के लिए ड्राइवर्स अपना रहे हैं नए पैंतरे: एयरप्लेन मोड से लेकर राइड कैंसिल करने तक का खेल

प्रशासन की पाबंदी के बाद जब ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की टीमों ने सड़कों पर औचक चेकिंग अभियान तेज किया और सैकड़ों गाड़ियों के चालान काटकर उन्हें जब्त करना शुरू किया, तो ड्राइवर्स ने भी पुलिस के शिकंजे से बचने के लिए अपने तरीके बदल लिए। वर्तमान स्थिति यह है कि कई ड्राइवर यात्री से बुकिंग मिलने के बाद फोन को 'एयरप्लेन मोड' पर डाल देते हैं ताकि जीपीएस या लोकेशन के जरिए ऐप कंपनियों या प्रशासन की नजरों में न आएं और सीधे तय किराए पर नगद भुगतान ले सकें। इसके अलावा, कई मामलों में राइड शुरू होने से ठीक पहले ऐप पर बुकिंग कैंसिल करवा दी जाती है और आपसी सहमति से सफर तय किया जाता है ताकि कोई डिजिटल रिकॉर्ड या सबूत पीछे न छूटे। इतना ही नहीं, शहर के जिन चौराहों या वीवीआईपी इलाकों में पुलिस की नाकाबंदी ज्यादा सख्त होती है, वहां ड्राइवर्स पूरी तरह से ऑफलाइन होकर गलियों के रास्तों से अपनी बाइक निकालते हैं ताकि किसी भी बड़ी कार्रवाई से बच सकें।

चंडीगढ़ पुलिस का नया दांव: सिविल कपड़ों में खुद बुक कर रहे हैं बाइक टैक्सी और रंगे हाथों धर दबोच रहे हैं नियम तोड़ने वाले

ड्राइवर्स के इन नए और शातिर तरीकों से निपटने के लिए अब चंडीगढ़ पुलिस ने भी अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है और पूरी मुस्तैदी के साथ कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिसकर्मी अब सादे कपड़ों में खुद इन प्रतिबंधित ऐप्स का इस्तेमाल करके ग्राहक के रूप में बाइक टैक्सी बुक कर रहे हैं और जैसे ही गाड़ी निर्धारित स्थान पर पहुंचती है, वे ड्राइवर को रोककर उसके मोबाइल और ऐप्स की बारीकी से जांच करते हैं। इस तरह की गुप्त और ट्रैप कार्रवाई के जरिए पुलिस ने अब तक सैकड़ों वाहनों के खिलाफ भारी जुर्माने के साथ चालान काटने और गाड़ियों को जब्त करने की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। आंकड़ों के मुताबिक इस विशेष अभियान में सबसे ज्यादा संख्या बाइक टैक्सियों की ही है, जो यह साबित करती है कि प्रतिबंध के बावजूद सड़कों पर इनका संचालन कितनी बड़ी मात्रा में जारी है।

तकनीकी और प्रशासनिक उलझन के बीच आम जनता और चालकों की परेशानी, आगे क्या होगा समाधान

प्रशासन की सख्ती और ड्राइवरों की इस लुकाछिपी के इस दौर में सबसे ज्यादा पिस आम जनता और वे मध्यमवर्गीय युवा रहे हैं जो कम समय और कम किराए में शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचने के लिए इन बाइक टैक्सियों पर निर्भर रहते थे। ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल पाबंदी लगा देने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए एक ऐसा व्यावहारिक और संतुलित फ्रेमवर्क तैयार किया जाना चाहिए जिससे यात्रियों की सुरक्षा भी पुख्ता हो सके और इन चालकों की रोजी-रोटी का जरिया भी कानूनी दायरे में सुरक्षित रह सके। जब तक प्रशासन और इन aggregators के बीच नियमों को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बनती, तब तक चंडीगढ़ की सड़कों पर पुलिस और बाइक टैक्सी चालकों के बीच यह आंख-मिचौली का खेल यूं ही जारी रहने की आशंका है।