सजा या सोची-समझी साजिश? साक्षी महाराज ने उन्नाव के चर्चित केस पर फिर खोल दिया विवादों का पिटारा

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News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कब क्या नया मोड आ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। खासकर तब, जब बात उन्नाव की हो और बयान देने वाले भाजपा के 'फायरब्रांड' सांसद साक्षी महाराज हों। हाल ही में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश में सियासी सरगर्मी तेज कर दी है। साक्षी महाराज ने एक सार्वजनिक चर्चा में खुलकर दावा किया कि उन्नाव के चर्चित मामले के मुख्य किरदार और सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के साथ 'अन्याय' हुआ है।

क्या है पूरा मामला?
बात शुरू होती है उन्नाव से, जहाँ साक्षी महाराज कुलदीप सेंगर के परिवार से मिलने पहुँचे थे। उन्होंने पत्रकारों और समर्थकों के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि सेंगर को जानबूझकर टारगेट किया गया और एक साजिश के तहत उन्हें इस मुश्किल स्थिति में पहुँचाया गया है। सांसद महाराज यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि जनता सब देख रही है और आने वाले समय में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

कानूनी हकीकत बनाम राजनीतिक समर्थन
देखा जाए तो एक तरफ भारत की अदालतें कुलदीप सिंह सेंगर को रेप और आपराधिक साजिश जैसे संगीन मामलों में उम्रकैद की सजा सुना चुकी हैं। लेकिन दूसरी तरफ, स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ और साक्षी महाराज जैसे वरिष्ठ नेताओं का समर्थन कुछ और ही कहानी कहता है।

राजनीतिक जानकार इसे वोट बैंक की रणनीति मान रहे हैं, क्योंकि उन्नाव के आसपास के इलाकों में आज भी सेंगर समर्थकों की एक बड़ी तादाद है। ऐसे में चुनाव के करीब आते ही उनके समर्थन में बयान देना भाजपा की अंदरूनी मजबूरी है या न्याय के प्रति सांसद का अपना नजरिया, यह बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।

साक्षी महाराज के बयान पर क्यों मचा बवाल?
जैसे ही यह बयान वायरल हुआ, विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। लोगों का कहना है कि जब न्यायालय ने किसी को दोषी ठहराया है, तो जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग 'अन्याय' जैसे शब्द का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? क्या यह पीड़ित परिवार की हिम्मत तोड़ने की कोशिश है? या फिर साक्षी महाराज सिर्फ अपनी दोस्ती निभा रहे हैं?

सेंगर की बेटी भी लगातार सोशल मीडिया पर अपने पिता की बेगुनाही को लेकर कैंपेन चलाती रहती हैं, जिसे अब साक्षी महाराज के बयान से एक बड़ी सियासी संजीवनी मिली है।