अमेरिका में सिस्टम बदलने की तैयारी? ट्रंप का नया दांव, चुनावी प्रक्रिया को पलटने के संकेत से मची खलबली

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News India Live, Digital Desk: अमेरिका के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर भूचाल आ गया है। 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) और 'सेव अमेरिका' जैसे नारों के बाद, अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राज्य अमेरिका की दशकों पुरानी चुनावी प्रक्रिया (Electoral Process) पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप के इस नए रुख ने विशेषज्ञों और विपक्षी दलों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या अमेरिका अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक ढांचे में आमूलचूल बदलाव देखने वाला है?

ट्रंप का मिशन: चुनावी सुधार या सत्ता पर पकड़?

हालिया बयानों और रणनीतियों से यह संकेत मिल रहे हैं कि ट्रंप प्रशासन चुनावी नियमों में बड़े बदलाव की योजना बना रहा है। इसमें मेल-इन बैलट (डाक मतपत्र), वोटर आईडी कानून और चुनाव परिणामों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया शामिल है। ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि चुनाव को 'सुरक्षित और पारदर्शी' बनाने के लिए यह जरूरी है, जबकि आलोचक इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश करार दे रहे हैं।

इन 3 बड़े बदलावों पर है नजर:

वोटर वेरिफिकेशन: मतदान के समय पहचान पत्र के नियमों को बेहद सख्त करना।

मेल-इन बैलट पर रोक: डाक द्वारा भेजे जाने वाले मतपत्रों की संख्या को सीमित या पूरी तरह खत्म करने की दिशा में कदम।

प्रमाणीकरण की शक्ति: चुनाव नतीजों को प्रमाणित करने में स्थानीय और राज्य अधिकारियों की भूमिका में फेरबदल।

क्या कहता है विपक्ष?

डेमोक्रेटिक पार्टी और कई नागरिक अधिकार संगठनों ने ट्रंप के इन इरादों को 'लोकतंत्र के लिए खतरा' बताया है। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में इस तरह के हस्तक्षेप से आम जनता का चुनाव प्रणाली से भरोसा उठ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम साल 2020 के चुनाव परिणामों को लेकर उनके पुराने दावों की अगली कड़ी है।

वैश्विक राजनीति पर क्या होगा असर?

यदि अमेरिका जैसी महाशक्ति अपनी चुनावी प्रक्रिया में बड़े बदलाव करती है, तो इसका असर दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों पर पड़ना तय है। क्या ट्रंप 'सेव अमेरिका' के अपने वादे को पूरा करने के लिए सिस्टम को पूरी तरह बदल देंगे? यह आने वाले समय का सबसे बड़ा सवाल है।