लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी? समझिए क्या है पूरा गणित और विपक्ष को चाहिए कितने वोट

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News India Live, Digital Desk: भारतीय राजनीति के गलियारे में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि विपक्षी दल (I.N.D.I.A. गठबंधन) लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ 'अविश्वास प्रस्ताव' लाने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। हालांकि यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है, लेकिन इस कदम ने सियासी तापमान को बढ़ा दिया है।

क्या ओम बिरला को पद से हटाना मुमकिन है?

लोकसभा अध्यक्ष का पद संवैधानिक रूप से बेहद शक्तिशाली होता है। संविधान के अनुच्छेद 94 और 96 के तहत स्पीकर को हटाने का प्रावधान है। लेकिन इसके लिए विपक्ष को केवल शोर मचाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सदन के भीतर एक बड़ी संख्या की जरूरत होगी।

वोटों का जादुई गणित: विपक्ष को कितने चाहिए?

ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष को लोकसभा के 'प्रभावी बहुमत' (Effective Majority) की आवश्यकता होगी।

कुल सदस्य संख्या: वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं।

बहुमत का आंकड़ा: किसी भी स्पीकर को हटाने के लिए सदन के तत्कालीन उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत की जरूरत होती है। यानी 543 सदस्यों वाली सदन में 272 या उससे अधिक वोटों की आवश्यकता होगी।

विपक्ष की स्थिति: वर्तमान में विपक्षी गठबंधन के पास करीब 234-236 सीटें हैं, जो बहुमत के आंकड़े से काफी दूर है। बिना सत्ता पक्ष के कुछ घटक दलों (जैसे JDU या TDP) के समर्थन के, इस प्रस्ताव का सफल होना लगभग नामुमकिन है।

प्रस्ताव लाने की क्या है प्रक्रिया?

अगर विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहता है, तो उसे कुछ नियमों का पालन करना होगा:

14 दिन का नोटिस: स्पीकर को हटाने के लिए कम से कम 14 दिन पहले लिखित सूचना देनी अनिवार्य है।

50 सदस्यों का समर्थन: प्रस्ताव को सदन में पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी है।

चर्चा और वोटिंग: नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद, सदन में इस पर चर्चा होती है और फिर वोटिंग कराई जाती है।

विपक्ष क्यों है नाराज?

विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही के दौरान उनकी आवाज को दबाया जा रहा है और सांसदों के निलंबन जैसी कार्रवाइयां एकतरफा हैं। इसी नाराजगी को जाहिर करने के लिए 'अविश्वास प्रस्ताव' को एक राजनीतिक हथियार के रूप में देखा जा रहा है।