टीपू सुल्तान की अंगूठी पर राम और सावरकर का 'व लेटर ओवैसी के बयान से सियासी भूचाल, BJP ने लगाया इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप

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News India Live, Digital Desk: 18वीं सदी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के ताजा बयान ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को नाराज कर दिया है। ओवैसी ने टीपू सुल्तान को अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाला 'शहीद' बताते हुए वीर सावरकर पर तीखा तंज कसा है, जिसके बाद बीजेपी ने उन पर इतिहास को विकृत करने का आरोप लगाया है।

सावरकर बनाम टीपू सुल्तान: ओवैसी का तीखा हमला

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों से लोहा लिया और जंग के मैदान में अपनी जान कुर्बान कर दी। उन्होंने वीर सावरकर का नाम लिए बिना हमला बोलते हुए कहा, "टीपू ने अंग्रेजों को माफी मांगने के लिए 'लव लेटर' (प्रेम पत्र) नहीं लिखे थे, जैसा सावरकर ने किया था।" ओवैसी ने दावा किया कि जब टीपू सुल्तान शहीद हुए, तो उनकी उंगली में जो अंगूठी मिली थी, उस पर 'राम' लिखा हुआ था।

अब्दुल कलाम और गांधीजी का दिया हवाला

अपनी बात को पुख्ता करने के लिए ओवैसी ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की किताब 'विंग्स ऑफ फायर' का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कलाम साहब ने खुद लिखा था कि भारत की मिसाइल और रॉकेट तकनीक टीपू के सपनों का ही विस्तार है। इतना ही नहीं, ओवैसी ने महात्मा गांधी की पत्रिका 'यंग इंडिया' का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधीजी ने टीपू सुल्तान को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना था।

BJP का पलटवार: 'इतिहास को तोड़-मरोड़ रहे हैं ओवैसी'

ओवैसी के इस बयान पर तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ओवैसी और उनकी पार्टी टीपू सुल्तान का महिमामंडन करके इतिहास के साथ खिलवाड़ कर रही है। बीजेपी का तर्क है कि टीपू सुल्तान ने मैसूर और कर्नाटक के क्षेत्रों में हिंदुओं का उत्पीड़न किया था और वह हिंदू विरोधी मानसिकता रखते थे। राव ने कहा कि भारत कभी भी इस 'झूठे इतिहास' को स्वीकार नहीं करेगा।

विवाद की जड़ में महाराष्ट्र की राजनीति

यह विवाद तब और गहरा गया जब महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस तुलना को 'शर्मनाक' और 'निंदनीय' करार दिया है। वर्तमान में मालेगांव में टीपू सुल्तान की फोटो को लेकर भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तकरार जारी है।