Phalguna Amavasya 2026 : फाल्गुन अमावस्या पर पितर करेंगे 7 पीढ़ियों का उद्धार, जानें शुभ मुहूर्त
News India Live, Digital Desk : फाल्गुन मास की अमावस्या पितरों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक मानी जाती है। साल 2026 में फाल्गुन अमावस्या पर 'भौमवती अमावस्या' का विशेष संयोग बन रहा है, क्योंकि यह मंगलवार के दिन पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान-दान और तर्पण से न केवल पितृ दोष दूर होता है, बल्कि सात पीढ़ियों तक के पूर्वजों का उद्धार होता है।
फाल्गुन अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस साल अमावस्या तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहेगी, लेकिन उदयातिथि और दान-पुण्य के लिए 17 फरवरी का दिन श्रेष्ठ माना गया है।
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 फरवरी 2026, शाम 05:34 बजे से
अमावस्या तिथि समाप्त: 17 फरवरी 2026, शाम 05:30 बजे तक
उदयातिथि और व्रत: 17 फरवरी 2026, मंगलवार
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:16 से 06:07 तक (स्नान-दान के लिए सर्वश्रेष्ठ)
अमृत काल: सुबह 10:39 से दोपहर 12:17 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:28 से 03:13 तक
पितृ दोष दूर करने के प्रभावी उपाय
यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष है या परिवार में अशांति और बाधाएं बनी रहती हैं, तो इस दिन निम्नलिखित उपाय जरूर करें:
दक्षिण दिशा की ओर तर्पण: सुबह पवित्र नदी में स्नान करें। इसके बाद हाथ में काले तिल, कच्चा दूध और फूल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करें।
पीपल के पेड़ की पूजा: पीपल के पेड़ में देवताओं और पितरों का वास माना जाता है। इस दिन पीपल की जड़ में जल अर्पित करें और शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे शनि दोष और पितृ दोष दोनों शांत होते हैं।
चींटियों और पशुओं की सेवा: पितरों को प्रसन्न करने के लिए आटे में शक्कर मिलाकर चींटियों को डालें। इसके अलावा गाय, कुत्ते और कौवे को भोजन कराना न भूलें।
दान का महत्व: इस दिन काले तिल, अनाज, वस्त्र, गुड़ और घी का दान करना चाहिए। विशेष रूप से ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
भौमवती अमावस्या का विशेष महत्व
चूंकि यह अमावस्या मंगलवार को है, इसलिए इसे भौमवती अमावस्या कहा जाता है। यह दिन कर्ज से मुक्ति पाने और मंगल ग्रह के दोषों को दूर करने के लिए भी उत्तम है। इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना और चमेली के तेल का दीपक जलाना शुभ फल देता है।
सूर्य ग्रहण का संयोग (Kankanakriti Surya Grahan)
विशेष बात यह है कि 17 फरवरी 2026 को वर्ष का पहला कंकणाकृती सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। हालांकि, ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा। फिर भी, ग्रहण के दिन दान-पुण्य करने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।