Period Pain Relief : पीरियड्स के दर्द और ऐंठन से चाहिए तुरंत छुटकारा? रोज़ाना बस 5 मिनट करें गर्भ पिंडासन ,जानें सही तरीका
News India Live, Digital Desk: हर महीने होने वाले पीरियड्स (Periods) अपने साथ कमर दर्द, पेट में ऐंठन और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं लेकर आते हैं। अक्सर महिलाएं इसके लिए पेनकिलर्स का सहारा लेती हैं, जिनके लंबे समय में साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। लेकिन योग विज्ञान में एक ऐसा आसन है जो न केवल गर्भाशय (Uterus) की मांसपेशियों को आराम देता है, बल्कि हार्मोनल असंतुलन को भी ठीक करता है। इसका नाम है 'गर्भ पिंडासन' (Garbha Pindasana)।
क्या है 'गर्भ पिंडासन'?
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस आसन में शरीर की आकृति गर्भ में पल रहे एक भ्रूण (Fetus) की तरह हो जाती है। यह आसन पेट के अंगों की गहरी मालिश करता है और पेल्विक एरिया में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है।
गर्भ पिंडासन करने के जबरदस्त फायदे:
पीरियड्स की ऐंठन में कमी: यह गर्भाशय की सिकुड़न को कम करता है, जिससे पीरियड्स के दौरान होने वाले तेज दर्द में राहत मिलती है।
पाचन तंत्र में सुधार: यह पेट के निचले हिस्से पर दबाव डालता है, जिससे कब्ज और गैस की समस्या दूर होती है।
मानसिक शांति: यह आसन नर्वस सिस्टम को शांत करता है, जिससे पीरियड्स के दौरान होने वाली चिड़चिड़ापन और तनाव कम होता है।
रीढ़ की हड्डी में लचीलापन: पीठ और कमर के निचले हिस्से की मांसपेशियों को स्ट्रेच कर यह कमर दर्द से मुक्ति दिलाता है।
कैसे करें गर्भ पिंडासन? (Step-by-Step Guide)
सबसे पहले जमीन पर मैट बिछाकर पद्मासन (Lotus Pose) की मुद्रा में बैठ जाएं।
अब अपने दोनों हाथों को जांघों और पिंडलियों के बीच की खाली जगह में डालें।
अपनी कोहनियों को बाहर निकालते हुए धीरे से दोनों हाथों से अपने कानों को पकड़ें।
शरीर का पूरा वजन कूल्हों (Hips) पर संतुलित करें और इस मुद्रा में 30 से 60 सेकंड तक रुकें।
गहरी सांस लेते रहें और धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।
सावधानी:
अगर आपको घुटनों में तेज दर्द, स्लिप डिस्क या साइटिका की समस्या है, तो इस आसन को बिना विशेषज्ञ की सलाह के न करें। शुरुआत में इसे किसी योग गुरु की देखरेख में करना बेहतर होता है।