स्वर्ग का सुकून या नर्क का टॉर्चर? जानिए आपके कौन से कर्म खोलेंगे यमलोक का कौन सा दरवाजा

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News India Live, Digital Desk : अक्सर जब भी किसी की मृत्यु होती है, तो हमारे यहाँ गरुड़ पुराण पढ़ने की परंपरा है। ऐसा इसलिए नहीं कि हम डराना चाहते हैं, बल्कि इसलिए कि जाने वाली आत्मा का रास्ता साफ हो सके और जिंदा लोग अपनी आदतों को सुधार सकें। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि यमराज के महल यानी यमपुरी के चार मुख्य द्वार होते हैं और हमारी आत्मा किस दरवाजे से प्रवेश करेगी, यह हमारे जीवित रहते किए गए काम तय करते हैं।

यमपुरी के चार दरवाजे: कहाँ से शुरू होता है स्वर्ग और कहाँ से नर्क?

  1. पूर्व का दरवाजा (East Gate): यह दरवाजा उन लोगों के लिए खुलता है जिनका जीवन सात्विक था। अगर आपने जीवन भर धार्मिक चिंतन किया, ऋषियों और गुरुओं का सम्मान किया और कभी किसी का बुरा नहीं चाहा, तो आपकी आत्मा इसी भव्य और दिव्य दरवाजे से प्रवेश करती है। इसे स्वर्ग का प्रवेश द्वार माना जाता है जहाँ परम शांति मिलती है।
  2. उत्तर का दरवाजा (North Gate): उत्तर दिशा को शुभ माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जिन्होंने अपनी इंद्रियों पर विजय पाई, जिन्होंने तीर्थ यात्राएँ कीं या जिन्होंने समाज की सेवा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया, उन्हें इसी रास्ते से ले जाया जाता है। यहाँ आत्मा को एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है।
  3. पश्चिम का दरवाजा (West Gate): यह द्वार उन लोगों के लिए है जो महादानी थे। अगर आपने दूसरों की मदद के लिए अपने धन, समय और संसाधनों का त्याग किया, अन्नदान और कन्यादान जैसे शुभ कर्म किए, तो आपकी रूह पश्चिम द्वार से अंदर जाती है। यहाँ भी सजा का प्रावधान नहीं होता, बल्कि शांतिपूर्ण स्थान मिलता है।
  4. दक्षिण का दरवाजा (South Gate): असल डर यहीं से शुरू होता है। गरुड़ पुराण कहता है कि पापी और दुष्ट आत्माओं के लिए सिर्फ दक्षिण का द्वार खुला रहता है। जिस इंसान ने दूसरों का हक मारा, कमजोरों को सताया और घोर पाप किए, उसे यमदूत इसी खौफनाक दरवाजे से खींचकर ले जाते हैं। इसी को 'नर्क की ओर जाने वाला रास्ता' कहा जाता है, जहाँ असहनीय यातनाएँ और पछतावा शुरू होता है।

जीवन के लिए एक जरूरी संदेश
इन कथाओं का मकसद हमें डराना नहीं है, बल्कि हमें 'कर्मा' (Karma) की अहमियत समझाना है। दरअसल, यह चार दरवाजे प्रतीक हैं—हमारी अच्छी और बुरी सोच के। इंसान को लगता है कि उसे कोई देख नहीं रहा, लेकिन गरुड़ पुराण की मानें तो कुदरत का अपना एक रजिस्टर है जहाँ पाई-पाई का हिसाब दर्ज होता है।

चाहे हम किसी भी धर्म या विचार के हों, अंत में हमारे मन की शांति इसी बात पर निर्भर करती है कि हमने कितनों के चेहरे पर मुस्कान दी और कितनों का दिल दुखाया। गरुड़ पुराण बस यही सिखाता है कि जीते जी इतने अच्छे बीज बो लो कि मरने के बाद आत्मा को 'सफर' का बोझ न लगे।

क्या आप भी इन बातों पर विश्वास करते हैं? या आपको लगता है कि स्वर्ग और नर्क सिर्फ इंसान की कल्पना हैं? हमें कमेंट में अपने विचार जरूर बताएँ।