Parliament Security Breach : हाई कोर्ट ने साफ कहा ये कोई इत्तेफाक नहीं था, ये देश को डराने की गहरी साजिश थी

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News India Live, Digital Desk: आपको 13 दिसंबर 2023 का वो दिन याद है? जब नई संसद भवन के अंदर अचानक पीला धुआं फैल गया था और अफरा-तफरी मच गई थी। उस मंजर ने पूरे देश को चौंका दिया था। अब उस मामले में एक बड़ा अपडेट आया है, और यह अपडेट उन लोगों के लिए सबक है जो इसे "महज एक विरोध प्रदर्शन" बता रहे थे।

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले की आरोपी नीलम आजाद की जमानत याचिका खारिज करते हुए जो बातें कहीं हैं, वो बहुत गंभीर हैं। कोर्ट का रुख बता रहा है कि जजों ने इस मामले को देश की संप्रभुता पर हमले की तरह देखा है।

'सिर्फ संयोग नहीं हो सकता'
जब नीलम आजाद के वकील ने दलील दी कि वो तो सिर्फ एक प्रदर्शन था और उनका मकसद किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था, तो जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इसे सिरे से नकार दिया। कोर्ट ने बहुत सख्त लहजे में कहा कि संसद जैसी जगह पर, जहाँ देश के सांसद बैठे हों, वहाँ स्मोक कैनिस्टर (धुए वाले पटाखे) लेकर घुसना कोई "इत्तेफाक" या "छोटा-मोटा विरोध" नहीं हो सकता।

हाई कोर्ट का मानना है कि यह पूरी घटना एक सोची-समझी और गहरी साजिश (Well-planned Conspiracy) थी। इसके पीछे का मकसद साफ था—संसद के कामकाज को रोकना और देश भर में एक 'डर' का माहौल पैदा करना।

मकसद देश को शर्मिंदा करना था
कोर्ट ने अपने ऑर्डर में एक बहुत बड़ी बात लिखी है। उन्होंने कहा कि आरोपियों का तरीका ऐसा था जिसका उद्देश्य न सिर्फ सांसदों को डराना था, बल्कि पूरी दुनिया के सामने भारत को शर्मिंदा करना भी था। संसद हमारे लोकतंत्र का मंदिर है, और वहाँ घुसकर ऐसी हरकत करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

जज ने साफ कर दिया कि संविधान आपको विरोध करने का हक देता है, लेकिन संसद के अंदर घुसकर आतंक या डर फैलाने का हक किसी को नहीं है। यह घटना आतंकवाद की परिभाषा के बहुत करीब है क्योंकि इसका मनोवैज्ञानिक असर (Psychological Impact) बहुत गहरा था।

अभी जेल में ही रहना होगा
आरोपी नीलम आजाद के वकीलों ने तर्क दिया था कि जांच पूरी हो चुकी है, तो उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। लेकिन पुलिस और सरकारी वकीलों ने बताया कि इनके खिलाफ UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) जैसी गंभीर धाराओं में केस है। और जिस तरह के डिजिटल सबूत (मोबाइल वगैरह) नष्ट किए गए, वह बताता है कि यह ग्रुप कितना शातिर था।

कुल मिलाकर, दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा में सेंधमारी के इस मामले में किसी भी आरोपी को अभी राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। कोर्ट का संदेश स्पष्ट है देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़, महज एक शरारत मानकर माफ नहीं किया जा सकता।