Pakistan-Afghanistan War : तालिबान लड़ाकों ने पार की डूरंड लाइन पाकिस्तान की 19 सैन्य चौकियों पर कब्जे का दावा 55 सैनिकों की मौत की खबर
News India Live, Digital Desk : अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ा जवाबी हमला शुरू किया है। तालिबान का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर कई किलोमीटर तक नियंत्रण कर लिया है। यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा अफगान क्षेत्र में किए गए हवाई हमलों के विरोध में की गई है।
1. तालिबान का घातक हमला और कब्जे का दावा
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय और प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद के अनुसार:
19 चौकियों पर कब्जा: तालिबान लड़ाकों ने डूरंड रेखा के साथ लगे पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया और कम से कम 19 अग्रिम चौकियों (Outposts) को अपने नियंत्रण में ले लिया।
सैनिकों की मौत और गिरफ्तारी: तालिबान ने दावा किया है कि इस मुठभेड़ में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और कई को जिंदा पकड़ लिया गया है।
हथियारों की जब्ती: कब्जे में ली गई चौकियों से भारी मात्रा में गोला-बारूद और सैन्य वाहन (टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां) जब्त करने का भी दावा किया गया है।
2. पाकिस्तान का 'ऑपरेशन गजब लिल हक' (Operation Ghazab Lil Haq)
पाकिस्तान ने तालिबान के इन दावों को 'अतिशयोक्ति' बताया है, लेकिन युद्ध की स्थिति को स्वीकार किया है:
खुला युद्ध: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे 'खुला युद्ध' (Open War) करार दिया है।
जवाबी एयरस्ट्राइक: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल, कंधार और खोस्त जैसे शहरों में तालिबान के ठिकानों पर भारी बमबारी की है। पाकिस्तान का दावा है कि उसने 130 से अधिक तालिबान लड़ाकों को ढेर कर दिया है।
TTP का मुद्दा: पाकिस्तान का कहना है कि यह हमला प्रतिबंधित संगठन टीटीपी (TTP) को बचाने के लिए तालिबान की एक चाल है।
3. युद्ध की वजह: क्यों भड़की यह आग?
इस ताजा संघर्ष के तीन प्रमुख कारण हैं:
हवाई हमले: 21-22 फरवरी को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में घुसकर एयरस्ट्राइक की थी, जिससे तालिबान भड़क उठा।
डूरंड रेखा विवाद: तालिबान कभी भी 1893 की इस सीमा रेखा को अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर नहीं मानता। वे इसे ब्रिटिश काल का थोपा हुआ विभाजन मानते हैं।
टीटीपी (TTP): पाकिस्तान आरोप लगाता है कि अफगान तालिबान अपने यहां पाकिस्तानी तालिबान के आतंकियों को पनाह दे रहा है।
4. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और खतरा
चीन और रूस की चिंता: दोनों देशों ने संयम बरतने की अपील की है और मध्यस्थता की पेशकश की है।
क्षेत्रीय अस्थिरता: जानकारों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा चला, तो दक्षिण एशिया में सुरक्षा का एक बड़ा संकट पैदा हो जाएगा, जिसका असर भारत और ईरान पर भी पड़ सकता है।