सिर्फ़ डोनल्ड ट्रंप ही ऐसा कह सकते हैं, जानिये क्यों वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में Dictator शब्द पर मचा है बवाल?
News India Live, Digital Desk: डोनल्ड ट्रंप और उनके बयान अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने स्विट्जरलैंड के दावोस (World Economic Forum) में जो कुछ कहा है, उसने दुनिया भर के दिग्गज नेताओं और मीडिया को सकते में डाल दिया है। डोनल्ड ट्रंप ने भरी सभा में अपने पुराने अंदाज में कुछ ऐसा कहा जिससे विवाद और उम्मीदों की एक नई बहस छिड़ गई है।
साफ शब्दों में कहें, तो उन्होंने खुद को 'Dictator' (तानाशाह) कह दिया!
आम तौर पर कोई भी नेता अपने लिए 'तानाशाह' जैसा शब्द सुनना भी पसंद नहीं करता, लेकिन ट्रंप ने इसे एक पदक की तरह पहन लिया। उन्होंने दावोस में मंच से कहा, "हाँ, मैं तानाशाह हूँ, लेकिन कभी-कभी इसकी ज़रूरत पड़ती है।" ट्रंप के इस बयान का इशारा उनकी कार्यशैली की ओर था, जहाँ वे सख्त फैसले लेने और विरोधियों की परवाह किए बिना काम करने के लिए जाने जाते हैं।
आख़िर ट्रंप ने ऐसा क्यों कहा?
अगर हम उनकी बात की गहराई में जाएँ, तो वह असल में अपनी मजबूती दिखा रहे थे। ट्रंप का तर्क है कि देश को चलाने के लिए कभी-कभी ऐसे फैसलों की ज़रूरत होती है जहाँ बिना समय गँवाए, मजबूती के साथ कदम उठाए जाएँ—भले ही उसे लोग तानाशाही कहें। यह उनके समर्थकों के लिए एक सिग्नल था कि अगर वे दोबारा सत्ता में आते हैं, तो वह 'बिज़नेस एज यूजुअल' नहीं होगा, बल्कि चीजें बहुत तेज़ी से बदलेंगी।
मंच दावोस का और बात अमेरिका की
दावोस में आमतौर पर दुनिया की अर्थव्यवस्था और पॉलिश की हुई भाषा में बातें होती हैं, लेकिन ट्रंप ने वहाँ के माहौल को अपनी बेबाकी से एकदम बदल दिया। आलोचकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान लोकतंत्र के लिए खतरा हो सकता है, जबकि उनके समर्थकों का मानना है कि अमेरिका को फिर से महान बनाने के लिए एक ऐसे ही सख्त नेतृत्व की ज़रूरत है जो किसी से न डरे।
इस समय अमेरिका में चुनावी माहौल है और ट्रंप जानते हैं कि दुनिया का ध्यान कैसे खींचना है। उनका यह बयान एक 'मास्टरस्ट्रोक' है या उनकी कोई पुरानी मंशा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात साफ हैट्रंप के इस बयान ने यह तो साबित कर दिया है कि उनकी वापसी बेहद 'हंगामेदार' रहने वाली है।