ONGC Gas Production: अरब सागर से निकलेगी तरक्की की नई राह! ONGC ने शुरू किया गैस का कमर्शियल उत्पादन; ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग
भारत की दिग्गज तेल और गैस कंपनी ओएनजीसी (ONGC) ने देश की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने सोमवार, 30 मार्च को घोषणा की कि उसने अरब सागर में स्थित अपने 'दमन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' (Daman Upside Development Project) के प्लेटफॉर्म B-12-24P से प्राकृतिक गैस की व्यावसायिक सप्लाई सफलतापूर्वक शुरू कर दी है। करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 8300 करोड़ रुपये) के भारी-भरकम निवेश से तैयार यह प्रोजेक्ट भारत की आयातित गैस पर निर्भरता कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।
मुंबई से 180 KM दूर समंदर में बिछाया जाल
यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मुंबई तट से लगभग 180 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम और गुजरात के पिपावाव से करीब 80 किलोमीटर दक्षिण में गहरे समंदर में स्थित है। ओएनजीसी के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म को पूरी तरह चालू कर दिया गया है और यहां से निकलने वाली गैस को पाइपलाइन के जरिए सीधे हजीरा प्लांट भेजा जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले समय में सभी कुओं से उत्पादन को धीरे-धीरे बढ़ाकर इसे अपनी पूरी क्षमता पर ले जाना है।
दो साल से कम समय में रिकॉर्ड तोड़ काम
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी निर्माण अवधि रही। ओएनजीसी ने इसे महज दो साल से भी कम समय में पूरा कर लिया, जो कि तय समय सीमा से काफी पहले है। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि बेहतर प्लानिंग, अत्याधुनिक तकनीक और ड्रिलिंग व प्रोडक्शन टीमों के बीच शानदार तालमेल की वजह से यह संभव हो पाया है। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से न केवल कंपनी का राजस्व (Monetization) बढ़ेगा, बल्कि देश के घरेलू गैस उत्पादन में भी महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।
ग्लोबल एनर्जी संकट के बीच भारत का 'मास्टरस्ट्रोक'
मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-अमेरिका युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों के बीच यह विकास भारत के लिए सामरिक रूप से बेहद अहम है। वर्तमान में भारत अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग 50% जरूरतें आयात के जरिए पूरी करता है। ऐसे में घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी से देश पर वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कम होगा। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ओएनजीसी ने 22 मिलियन टन कच्चे तेल के उत्पादन का लक्ष्य रखा है, और नए कुओं से उत्पादन शुरू होने के बाद इसमें और सुधार की उम्मीद है।
रिलायंस के साथ हाथ मिलाकर पूर्वी तट पर भी होगी खोज
पश्चिमी तट के साथ-साथ अब ओएनजीसी की नजरें भारत के पूर्वी तट (महानदी, केजी बेसिन और अंडमान क्षेत्र) पर टिकी हैं। गहरे पानी में अन्वेषण (Deepwater Exploration) की जटिलताओं और उच्च लागत से निपटने के लिए ओएनजीसी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ हाथ मिलाया है। दोनों कंपनियां कृष्णा गोदावरी बेसिन में अपने संसाधनों और तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करेंगी, ताकि उत्पादन की लागत कम की जा सके और काम की रफ्तार बढ़ाई जा सके।
दुनिया की 10 दिग्गज कंपनियों से मांगा सहयोग
उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ओएनजीसी वैश्विक विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार कर रही है। कंपनी ने शेल, एक्सॉनमोबिल, टोटलएनर्जीज़ और शेवरॉन जैसी दुनिया की 10 बड़ी तेल कंपनियों से तकनीकी सहयोग के लिए बोलियां मांगी हैं। ओएनजीसी के निदेशक (उत्पादन) पंकज कुमार के अनुसार, विदेशी तकनीक के समावेश से पुराने तेल और गैस क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।