ट्रंप की एक दहाड़ और कनाडा लाइन पर आ गया, चीन के साथ व्यापार पर कह दी बड़ी बात

Post

News India Live, Digital Desk: दुनिया की राजनीति में कब क्या हो जाए, कहा नहीं जा सकता। लेकिन एक नाम ऐसा है जिसके आते ही बड़े-बड़े देशों की हवाइयां उड़ जाती हैं, और वो नाम है डोनाल्ड ट्रंप। अभी ट्रंप ने सत्ता संभाली भी नहीं है, लेकिन उनके बयानों का असर दिखना शुरू हो गया है। ताज़ा मामला कनाडा का है, जहां ट्रंप की एक 'धमकी' ने कनाडा को अपनी नीति साफ करने पर मजबूर कर दिया है।

मामला यह है कि कनाडा ने अब चीन को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है, जो अमेरिका को खुश करने और चीन को झटका देने वाला है।

आखिर हुआ क्या?

कहानी कुछ यूँ है कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने पड़ोसी देशों (कनाडा और मेक्सिको) और चीन को एक सख्त चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर सीमा सुरक्षा और ड्रग्स तस्करी के मामले नहीं सुधरे, तो वो इन देशों से आने वाले सामान पर 100% टैरिफ (भारी टैक्स) लगा देंगे।

ट्रंप की यह धमकी कोई मामूली बात नहीं है। अगर ऐसा हुआ, तो कनाडा की अर्थव्यवस्था हिल जाएगी क्योंकि उनका बहुत सारा सामान अमेरिका में बिकता है।

कनाडा ने क्या जवाब दिया?

इस धमकी के बाद कनाडा के पूर्व बैंक गवर्नर और प्रधानमंत्री ट्रूडो के करीबी सलाहकार मार्क कार्नी (Mark Carney) सामने आए। उन्होंने एक बहुत ही स्पष्ट बयान दिया है। कार्नी ने कहा है कि कनाडा का चीन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) करने का कोई प्लान नहीं है।

आसान भाषा में समझें तो कनाडा ने साफ़ कह दिया है कि हम चीन के साथ व्यापार में वो वाली 'खास दोस्ती' नहीं करने वाले, जिसमें टैक्स छूट मिलती है। मार्क कार्नी का कहना है कि चीन और कनाडा के रिश्ते जटिल हैं और ऐसे माहौल में चीन के साथ फ्री ट्रेड का सवाल ही नहीं उठता।

अमेरिका को मनाने की कोशिश?

राजनीति को समझने वाले मान रहे हैं कि यह कनाडा की तरफ से अमेरिका को भेजा गया एक 'सफाई संदेश' है। कनाडा यह जताना चाहता है कि "देखो भाई, हम तुम्हारे साथ हैं, चीन के साथ नहीं।" मार्क कार्नी ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका उनका सबसे करीबी पड़ोसी और सबसे बड़ा सहयोगी है।

जाहिर है, कनाडा कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहता जिससे अमेरिका नाराज़ हो जाए। कनाडा जानता है कि अगर ट्रंप ने टैरिफ लगा दिए, तो वहां की फैक्ट्रियों और नौकरियों पर आफत आ जाएगी।

चीन के लिए क्या संकेत है?

चीन हमेशा दुनिया भर में नए बाज़ार तलाशता रहता है। कनाडा का यह रुख चीन के लिए मायूसी भरा हो सकता है। इससे यह साफ़ हो गया है कि उत्तरी अमेरिका (North America) में अब चीन के लिए रास्ते आसान नहीं होंगे। अमेरिका और कनाडा अब एक ही सुर में बोल रहे हैं।

कुल मिलाकर बात यह है कि ट्रंप की रणनीति काम करती दिख रही है। कनाडा ने अपनी प्राथमिकता तय कर ली है—और वो है अपने 'पड़ोसी' (अमेरिका) के साथ मिलकर चलना, न कि सात समंदर पार वाले 'प्रतिद्वंदी' (चीन) के साथ।