पुरानी दलीलों से अब नहीं चलेगा काम, CJI सूर्यकांत ने वकीलों को क्यों दी खुद को अपडेट करने की सलाह?

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News India Live, Digital Desk: दुनिया तेज़ी से बदल रही है और उसके साथ-साथ बदल रहे हैं 'जुर्म' करने के तरीके। पुराने दौर में अपराध गली-नुक्कड़ तक सीमित होते थे, लेकिन आज का अपराधी स्क्रीन के पीछे बैठकर हज़ारों किलोमीटर दूर बैठा होता है। इसी बात को समझते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कानूनी जगत के लिए एक बेहद ज़रूरी संदेश दिया है।

कानून की पढ़ाई सिर्फ डिग्री तक नहीं
अक्सर माना जाता है कि वकालत की डिग्री मिल गई तो बस काम खत्म। लेकिन CJI ने साफ़ कर दिया है कि एक अच्छे वकील को 'लाइफ-लॉन्ग स्टूडेंट' बने रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब अपराधी आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो वकील पुरानी फाइलों और पुराने तौर-तरीकों के सहारे न्याय कैसे दिला पाएंगे?

हाई-टेक जुर्म और कानूनी चुनौती
आज के दौर में साइबर फ्रॉड, डिजिटल जालसाजी और डेटा चोरी जैसे मामले बढ़ रहे हैं। इन केसों में सबूत भी डिजिटल होते हैं। CJI का मानना है कि अगर वकीलों को तकनीक की समझ नहीं होगी, तो वे अदालत में मजबूती से पक्ष नहीं रख पाएंगे। यह सलाह सिर्फ युवा वकीलों के लिए नहीं है, बल्कि सालों से प्रैक्टिस कर रहे सीनियर वकीलों के लिए भी एक संकेत है कि वक़्त के साथ खुद को बदलना ही अब एकमात्र रास्ता है।

न्याय मिलने में तकनीक की भूमिका
लेख में साफ़ नजर आता है कि अदालती कार्यवाही को सरल और तेज़ बनाने के लिए जस्टिस सूर्यकांत लगातार तकनीक के इस्तेमाल की वकालत करते रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वकील अपडेटेड होंगे, तो मुकदमों की सुनवाई में लगने वाला वक्त कम होगा और न्याय मिलने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।