UP के सरकारी स्कूलों में अब हेडमास्टर की चलेगी ,परिषद ने दिया बड़ा अधिकार
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों (सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों) की शिक्षा व्यवस्था में योगी सरकार एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब प्रदेश के लाखों स्कूलों में पढ़ाई का समय और विषयों का बंटवारा रटा-रटाया नहीं होगा। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद ने स्कूलों के प्रधानाध्यापकों (Principals) को यह पावर दे दी है कि वे अपने स्कूल की स्थानीय जरूरतों और शिक्षकों की उपलब्धता के आधार पर खुद का टाइम टेबल तैयार कर सकें।
क्यों बदला गया सालों पुराना नियम?
अब तक प्रदेश के सभी परिषदीय स्कूलों के लिए एक तय 'आदर्श समय सारणी' भेजी जाती थी, जिसका पालन करना हर स्कूल के लिए अनिवार्य था। लेकिन, अक्सर देखा गया कि किसी स्कूल में शिक्षकों की कमी है तो कहीं छात्रों की संख्या अधिक है। ऐसे में एक ही टाइम टेबल हर जगह फिट नहीं बैठ रहा था। परिषद ने माना कि हेडमास्टर अपने स्कूल की स्थिति को बेहतर जानते हैं, इसलिए उन्हें स्वायत्तता (Autonomy) देना जरूरी है ताकि पढ़ाई का नुकसान न हो।
शिक्षकों और बच्चों को मिलेगी बड़ी राहत
नई व्यवस्था के तहत, प्रधानाध्यापक अब यह तय कर सकेंगे कि कौन सा शिक्षक किस कक्षा में कौन सा विषय पढ़ाएगा। यदि किसी स्कूल में गणित के शिक्षक नहीं हैं या कम हैं, तो हेडमास्टर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर टाइम टेबल को एडजस्ट कर सकेंगे। इसके अलावा, खेलकूद, पुस्तकालय और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज के लिए भी स्कूल अपने स्तर पर समय निर्धारित कर पाएंगे। इससे न केवल शिक्षकों पर काम का बोझ संतुलित होगा, बल्कि बच्चों को भी बेहतर ढंग से सीखने का मौका मिलेगा।
गुणवत्ता पर रहेगी विभाग की नजर
हालांकि, हेडमास्टरों को छूट दी गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे नियमों की अनदेखी करेंगे। परिषद ने स्पष्ट किया है कि टाइम टेबल बनाते समय शिक्षण के कुल घंटों (Teaching Hours) और अनिवार्य विषयों के मानकों का पालन करना होगा। विभाग समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हेडमास्टरों द्वारा बनाया गया शेड्यूल बच्चों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने में मददगार साबित हो रहा है।
डिजिटल होगा नया शेड्यूल
इस नई नीति के तहत स्कूलों को अपना नया टाइम टेबल तैयार कर उसे विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर भी अपडेट करना पड़ सकता है। इससे शासन को यह जानकारी रहेगी कि किस स्कूल में किस तरह की शैक्षणिक गतिविधियां चल रही हैं। लखनऊ सहित पूरे यूपी के जिलों में इसे लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। शिक्षा विशेषज्ञों ने इस कदम की सराहना की है और इसे 'विकेंद्रीकृत शिक्षा मॉडल' की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।