UP में अब घर का नक्शा पास कराना होगा महंगा, योगी सरकार लागू करने जा रही है नया मॉडल रूल
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर है। योगी सरकार प्रदेश में 'मॉडल बिल्डिंग बायलॉज' (Model Building Bye-Laws) का नया ड्राफ्ट लागू करने की तैयारी में है। इस नए मॉडल रूल के लागू होते ही विकास प्राधिकरणों (Development Authorities) द्वारा नक्शा पास करने की फीस और अन्य शुल्कों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा और घर बनाना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो जाएगा।
क्यों बढ़ाई जा रही है नक्शा पास करने की फीस?
सरकार का तर्क है कि पिछले कई वर्षों से नक्शा पास करने और विकास शुल्क (Development Charges) में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस बीच निर्माण सामग्री, लेबर कॉस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की लागत में कई गुना इजाफा हुआ है। नए मॉडल रूल के जरिए सरकार पूरे प्रदेश में एक समान शुल्क व्यवस्था लागू करना चाहती है। आवास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम शहरों के नियोजित विकास और बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है।
इन शहरों में सबसे ज्यादा बढ़ सकते हैं दाम
नक्शा पास कराने की फीस में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा और आगरा जैसे बड़े शहरों में देखने को मिल सकती है। जानकारों का कहना है कि विकास शुल्क और निरीक्षण शुल्क (Inspection Fee) में 5% से लेकर 10% तक की वृद्धि होने की संभावना है। उदाहरण के तौर पर, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने पहले ही अपने शुल्कों में लगभग 3.58% की बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया है, जो आने वाले समय में नए नियमों के तहत और बढ़ सकता है।
क्या होगा आम आदमी पर असर?
अगर आप मध्यम वर्गीय परिवार से हैं और 1000 से 1500 स्क्वायर फीट के प्लॉट पर घर बनाने की सोच रहे हैं, तो नक्शा पास कराने के लिए अब आपको हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। केवल नक्शा ही नहीं, बल्कि नई नियमावली के तहत स्टैकिंग चार्ज (सड़क पर निर्माण सामग्री रखने का शुल्क) और अन्य लेवी भी बढ़ाई जा सकती हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले घरों को इन बढ़ी हुई दरों से राहत मिल सकती है।
बिल्डर्स और रियल एस्टेट सेक्टर की बढ़ी चिंता
सरकार के इस फैसले से केवल आम आदमी ही नहीं, बल्कि बिल्डर्स भी चिंतित हैं। बिल्डर्स का कहना है कि नक्शा शुल्क बढ़ने से प्रोजेक्ट की ओवरऑल कॉस्ट बढ़ जाएगी, जिसका बोझ अंततः फ्लैट खरीदने वाले ग्राहकों पर ही पड़ेगा। इससे रियल एस्टेट मार्केट में प्रॉपर्टी की कीमतें और उछल सकती हैं। फिलहाल, आवास विभाग इस नए मॉडल रूल के ड्राफ्ट पर अंतिम मंथन कर रहा है और जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है।