यूपी के गांवों में अब होगी हर महीने खुली बैठक, सीएम योगी ने कसे पेंच

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News India Live, Digital Desk : हम अक्सर सुनते हैं कि सरकार तो गांवों के लिए बहुत पैसा भेजती है, लेकिन गाँव आते-आते वो पैसा कहाँ गायब हो जाता है, पता ही नहीं चलता। कभी सड़क अधूरी, कभी नाली गायब। लेकिन अब लगता है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस गड़बड़झाले को खत्म करने की ठान ली है। पंचायत चुनाव की आहट के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बहुत ही सख्त फैसला लिया है।

क्या है यह नया 'मंथली प्लान'?

खबर यह है कि सीएम योगी ने अधिकारियों को साफ़ निर्देश दे दिए हैं कि अब गांवों के विकास कार्यों की समीक्षा साल-दो साल में नहीं, बल्कि हर महीने (Monthly Review) होगी। और सबसे बड़ी बात यह है कि यह समीक्षा बंद कमरों में नहीं होगी।

इसके लिए 'खुली बैठकों' का आयोजन किया जाएगा। इसका मतलब समझते हैं? इसका मतलब है कि गाँव के स्कूल, पंचायत भवन या चौपाल पर मीटिंग लगेगी। इसमें सरकारी अधिकारी, ग्राम प्रधान और सबसे ज़रूरी— 'गाँव की जनता' मौजूद रहेगी।

जनता के सामने होगा "दूध का दूध, पानी का पानी"

सोचिए, जब पूरे गाँव के सामने अधिकारी पूछेंगे कि "फलां नाली के लिए पैसा आया था, वो कहाँ बनी?", तब गलत जानकारी देना कितना मुश्किल होगा।
इन खुली बैठकों में तय किया जाएगा कि गाँव को किस चीज़ की ज़रूरत है और पिछले महीने जो पैसा आया था, वो सही जगह लगा या नहीं। अगर किसी प्रधान या अधिकारी ने गड़बड़ी की, तो भरी सभा में उनकी पोल खुलनी तय है।

पंचायत चुनाव की तैयारी?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम आने वाले पंचायत चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। सरकार चाहती है कि चुनाव से पहले गांवों में कामकाज की रफ़्तार तेज़ हो और जनता की नाराजगी दूर की जा सके। सीएम योगी चाहते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, न कि बिचौलियों की जेब में जाए।

गाँव वालों के लिए बड़ा मौका

यह हम आम लोगों के लिए बहुत अच्छी खबर है। अब आपको अपनी शिकायत लेकर तहसील या जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जब अधिकारी खुद आपके दरवाजे पर आएंगे, तो आप सीधे उनसे सवाल कर सकते हैं।

सीएम ने यह भी कहा है कि विकास का काम सिर्फ खानापूर्ति नहीं होना चाहिए, उसकी गुणवत्ता (Quality) भी जांची जाएगी। तो कुल मिलाकर, अब 'कामचोरी' नहीं चलने वाली।