इराक में नूरि अल-मालिकी की वापसी बर्दाश्त नहीं ,ट्रम्प ने खुले मंच से क्यों दे दी US मदद रोकने की धमकी?
News India Live, Digital Desk : अमेरिकी विदेश नीति हमेशा अपने कड़े और साफ-साफ फैसलों के लिए जानी जाती है, खासकर जब बात मिडिल ईस्ट यानी मध्य-पूर्व की हो। पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने फिर एक बड़ा और विवादास्पद बयान देकर इस क्षेत्र में हलचल मचा दी है। उनका निशाना सीधे इराक के पूर्व प्रधानमंत्री नूरि अल-मालिकी (Nouri al-Maliki) पर है।
ट्रम्प की सीधी धमकी क्या है?
ट्रम्प ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर इराक में राजनीतिक बदलाव आता है और एक बार फिर नूरि अल-मालिकी सत्ता में आते हैं, तो अमेरिका तुरंत इराक को अपना समर्थन (US Support to Iraq) देना बंद कर देगा।
अमेरिका के लिए यह समर्थन सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि वित्तीय मदद, सैन्य सहयोग और इंटेलिजेंस सपोर्ट के रूप में होता है। ऐसे में, अमेरिकी समर्थन रुकने का मतलब होगा कि इराक को अकेले मुश्किल हालात का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रम्प को मालिकी से क्या दिक्कत है?
मालिकी को लेकर ट्रम्प का रवैया इतना सख्त क्यों है, यह समझने के लिए हमें पुराने इतिहास को समझना होगा।
नूरि अल-मालिकी दो बार (2006 से 2014 तक) इराक के प्रधानमंत्री रहे हैं। उनके कार्यकाल को लेकर ट्रम्प हमेशा आलोचना करते रहे हैं, और इसकी मुख्य वजह है ईरान से संबंध (Iran-Iraq Relations)। ट्रम्प प्रशासन ने हमेशा ईरान पर सख्त रुख अपनाया, जबकि मालिकी पर अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि उनका झुकाव शिया समुदाय और उसके संरक्षक, यानी ईरान की तरफ ज्यादा रहता है।
ट्रम्प को लगता है कि मालिकी के दोबारा सत्ता में आने से इराक पूरी तरह से ईरान के प्रभाव (Iranian Influence) में आ जाएगा, जो अमेरिका और मिडिल ईस्ट में उसके सहयोगियों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।
मालिकी की वापसी के बाद इराक की राजनीतिक स्वतंत्रता और स्थिरता (Political Stability in Iraq) प्रभावित हो सकती है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा (Regional Security) के लिए खतरा है।
मध्य-पूर्व की राजनीति पर इसका क्या असर होगा?
अगर ट्रम्प अपना यह वादा पूरा करते हैं (यदि वह दोबारा राष्ट्रपति बनते हैं), तो:
- इराक होगा कमजोर: इराक फिलहाल आर्थिक अस्थिरता और चरमपंथियों से लगातार लड़ रहा है। अमेरिकी समर्थन वापस होने से इराक की सैन्य क्षमता और आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो सकती है।
- ईरान को फायदा: इराक कमजोर होगा तो ईरान का प्रभुत्व मध्य-पूर्व (Middle East Geopolitics) में और बढ़ जाएगा, जैसा ट्रम्प नहीं चाहते।
- अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में तनाव: ट्रम्प का यह कड़ा रुख दिखाता है कि उनकी अमेरिकी विदेश नीति (US Foreign Policy) 'अमेरिका फर्स्ट' और शर्तों पर आधारित रहेगी।
मालिकी फिलहाल सीधे सत्ता की रेस में नहीं हैं, लेकिन उनके राजनीति में बने रहने और मजबूत समर्थन के कारण ट्रम्प ने यह चेतावनी पहले से जारी कर दी है। यह चेतावनी साफ इशारा करती है कि ट्रम्प प्रशासन के तहत अमेरिका-इराक के रिश्ते (US-Iraq Relations) किस मोड़ पर खड़े होंगे।