Mahashivratri 2026 Upay: सुयोग्य वर और जल्द विवाह के लिए महाशिवरात्रि पर कुंवारी कन्याएं करें ये विशेष उपाय, शिव-शक्ति बरसाएंगे आशीर्वाद
नई दिल्ली/ज्योतिष डेस्क। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व केवल एक व्रत नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के मिलन का महा-उत्सव है। इस दिव्य रात्रि को महादेव स्वयं दूल्हा बनते हैं और माता पार्वती दुल्हन के रूप में उनका वरण करती हैं। मान्यता है कि इस दिन कुंवारी कन्याएं यदि पूरी आस्था के साथ महादेव की आराधना करती हैं, तो उन्हें न केवल सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है, बल्कि विवाह में आ रही समस्त बाधाएं भी दूर हो जाती हैं।
मनचाहा वर पाने के लिए महाशिवरात्रि का महत्व
वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व रविवार, 15 फरवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को शिव-पार्वती की पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से वे लोग जिनकी शादी में लंबे समय से अड़चनें आ रही हैं या रिश्ता तय होकर टूट जाता है, उनके लिए इस दिन की 'चार पहर की पूजा' एक वरदान की तरह है।
शुभ फल प्राप्ति के लिए पूजन विधि
कुंवारी कन्याओं को महाशिवरात्रि के दिन इस विशेष विधि से पूजा करनी चाहिए:
ब्रह्म मुहूर्त में शुरुआत: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (पीले या लाल रंग के) धारण करें। काले या भूरे रंग के कपड़ों से परहेज करें।
व्रत का संकल्प: पूजा घर को गंगाजल से शुद्ध करें और चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
पंचामृत अभिषेक: एक पात्र में शिवलिंग को रखकर दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल (पंचामृत) से अभिषेक करें।
प्रिय वस्तुओं का अर्पण: अभिषेक के बाद चंदन का लेप लगाएं और महादेव को उनके अति प्रिय बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें।
मां पार्वती का श्रृंगार: माता पार्वती को चुनरी चढ़ाएं और सोलह श्रृंगार (मेहंदी, चूड़ी, बिंदी आदि) अर्पित करें।
जल्द शहनाई बजने के लिए विशेष उपाय
यदि विवाह में देरी हो रही है, तो पूजा के दौरान इस खास विधि को अपनाएं:
खीर का भोग: भगवान शिव और मां पार्वती को केसर युक्त खीर का भोग लगाएं।
मंत्र जाप: पूजा के अंत में 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ गौरीशंकराय नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
शिव चालीसा का पाठ: श्रद्धापूर्वक शिव चालीसा और महाशिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें।
धूप-दीप: शुद्ध घी का दीपक जलाकर आरती करें और विवाह की बाधाएं दूर करने की प्रार्थना करें।
सावधानी और नियम
पूजा के दौरान मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें।
शिवरात्रि के दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) का त्याग करें।
संभव हो तो रात्रि जागरण करें और भगवान के भजनों में मन लगाएं।
मान्यता: भगवान शिव सरलता और वैराग्य के प्रतीक हैं। यदि कुंवारी कन्याएं सच्चे मन से इस दिन प्रार्थना करती हैं, तो माता पार्वती के आशीर्वाद से उन्हें भगवान शिव जैसा ही धैर्यवान और श्रेष्ठ जीवनसाथी प्राप्त होता है।