Mahashivratri 2026 : शिव के श्रृंगार में छिपा है ब्रह्मांड का गूढ़ रहस्य जानें महादेव और नंबर 3 के बीच का अनोखा कनेक्शन

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News India Live, Digital Desk: भगवान शिव, जिन्हें हम देवों के देव महादेव कहते हैं, उनका स्वरूप अन्य देवताओं से बिल्कुल भिन्न है। उनके शरीर पर भस्म, गले में नाग और हाथ में त्रिशूल ये सब कुछ गहरे अर्थ समेटे हुए हैं। आध्यात्मिक गुरुओं और शास्त्रों के अनुसार, शिव जी के पूरे अस्तित्व में 'अंक 3' (Number 3) का एक विशेष और अटूट संबंध है, जो सृष्टि के संचालन को दर्शाता है।

महादेव और 'नंबर 3' का रहस्यमय योग

शिव जी के स्वरूप में नंबर 3 का महत्व इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:

त्रिनेत्र (Three Eyes): शिव जी की तीन आंखें हैं। दायां नेत्र सूर्य (सत्त्व), बायां नेत्र चंद्रमा (रज) और तीसरा नेत्र अग्नि (तमस) का प्रतीक है। यह भूत, भविष्य और वर्तमान के दर्शन कराने वाला माना जाता है।

त्रिशूल (Trident): शिव का मुख्य अस्त्र त्रिशूल है, जिसमें तीन शूल होते हैं। ये मानवीय चेतना के तीन गुणों—सत, रज और तम—के बीच संतुलन का प्रतीक हैं। यह दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों के विनाश का भी संकेत है।

त्रिपुंड (Three Lines of Bhasma): महादेव के माथे पर भस्म की तीन रेखाएं (त्रिपुंड) होती हैं। ये रेखाएं आत्म-साक्षात्कार, शुद्धि और अहंकार के त्याग का प्रतिनिधित्व करती हैं।

त्रिलोकीनाथ: शिव तीनों लोकों (आकाश, पाताल और मृत्यु लोक) के स्वामी हैं।

शिव श्रृंगार के अन्य प्रतीकों का अर्थ

गंगा और चंद्रमा: मस्तक पर चंद्रमा मन की शांति और नियंत्रण का प्रतीक है, जबकि गंगा ज्ञान की अविरल धारा को दर्शाती है।

गले में नाग: वासुकी नाग काल (समय) का प्रतीक है, जिसे शिव ने अपने वश में कर रखा है।

रुद्राक्ष: यह शिव के आंसुओं से उत्पन्न माना जाता है, जो करुणा और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का स्रोत है।

[Image: Lord Shiva with Trishul, Damru and Tripund]

महाशिवरात्रि पर क्यों करें इन स्वरूपों का ध्यान?

मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात को ब्रह्मांड की ऊर्जा का स्तर बहुत ऊंचा होता है। यदि भक्त शिव के इन प्रतीकों का अर्थ समझकर उनका ध्यान करते हैं, तो उन्हें न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में 'संतुलन' (Balance) का महत्व भी समझ आता है।